कोलकाता में बढ़ी छत्तीसगढ़ की प्रतिष्ठा“सृजन तब सार्थक होता है जब वह समय की धूल में दबे सत्य को फिर से प्रकाश में लाता है।” इसी दृष्टि के साथ कार्य करते हुए छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार जिले के युवा फिल्मकार एस अंशु धुरंधर ने कोलकाता में आयोजित इंटरनेशनल स्टार फिल्म फेस्टिवल अवॉर्ड्स (ISFFA) 2026 में अंतरराष्ट्रीय अवार्ड प्राप्त कर उल्लेखनीय उपलब्धि दर्ज की है। उन्हें भारतीय फिल्म श्रेणी के अंतर्गत द्वितीय सर्वश्रेष्ठ डॉक्यूमेंट्री अवार्ड से सम्मानित किया गया। यह अवार्ड छत्तीसगढ़ के जननायक दाऊ चिंताराम टिकरिहा पर आधारित नौ वर्षों के गहन शोध से निर्मित उनकी डॉक्यूमेंट्री के लिए प्रदान किया गया। इस कृति में ऐतिहासिक तथ्यों, दस्तावेज़ों और सामाजिक संदर्भों को संतुलित ढंग से प्रस्तुत किया गया है।कोलकाता में आयोजित इस प्रतिष्ठित फिल्म महोत्सव में विश्व के 70 देशों से सैकड़ों फिल्मों की प्रविष्टियां प्राप्त हुईं। चयन प्रक्रिया कई चरणों में संपन्न हुई, जिसमें स्टोरी टेलिंग, रचनात्मकता, तकनीकी गुणवत्ता तथा सांस्कृतिक प्रभाव जैसे मानकों पर गहन मूल्यांकन किया गया। चयनित फिल्मों को अंतिम स्क्रीनिंग के लिए निर्धारित किया गया। 27 फरवरी को राज्य युवा केंद्र परिसर के विवेकानंद ऑडिटोरियम में नामांकित फिल्मों का प्रदर्शन मुख्य जूरी के समक्ष किया गया। निर्धारित मानकों के आधार पर अंक प्रदान किए गए और चार-स्तरीय प्रक्रिया पूर्ण होने के पश्चात 28 फरवरी को आयोजित समारोह में विजेताओं को अवार्ड प्रदान किए गए। इसी क्रम में एस अंशु धुरंधर को द्वितीय सर्वश्रेष्ठ डॉक्यूमेंट्री सम्मान से नवाजा गया।फेस्टिवल निदेशक सैकत दास ने बताया कि बड़ी संख्या में प्राप्त अंतरराष्ट्रीय प्रविष्टियों में से सीमित फिल्मों को ही अंतिम चरण तक पहुंचने का अवसर मिला। उन्होंने विशेष रूप से उल्लेख किया कि ऐतिहासिक रूप से उपेक्षित व्यक्तित्व को प्रमाणिक शोध और संतुलित प्रस्तुति के साथ पुनः सामने लाना निर्देशक धुरंधर की गंभीरता और तकनीकी दक्षता को दर्शाता है। जूरी ने इसी दृष्टिकोण को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया। गौरतलब है कि मार्च माह में इसी डॉक्यूमेंट्री का चयन बंगाल फिल्म एंड टेलीविजन चैंबर ऑफ कॉमर्स द्वारा आयोजित 11वें बंगाल इंटरनेशनल शॉर्ट फिल्म फेस्टिवल (BISFF) के लिए भी किया गया है, जिससे इस फिल्म की निरंतर प्रासंगिकता और स्वीकार्यता स्पष्ट होती है।एस अंशु धुरंधर 9 वर्ष की आयु से लेखन और 16 वर्ष की आयु से फिल्म निर्माण से जुड़े हुए हैं। अब तक वे इस डॉक्यूमेंट्री के अतिरिक्त द कुंग फु चाइल्ड (2013), द अल्टीमेट कुंग फु चाइल्ड (2015), महानिति (2017) तथा कर्तव्य की ओर (2018) जैसी फिल्मों में अभिनय एवं निर्देशन कर चुके हैं। उनकी प्रकाशित पुस्तकों में अधिनायक (2022), बाल क्रांतिकारी (2022), सरस्वती (2024) और चिंताराम (2024) शामिल हैं। वर्तमान में वे दो पुस्तकों के लेखन में संलग्न हैं तथा तीन फिल्में निर्माणाधीन हैं।देश-विदेश के 10 से अधिक राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सवों में उनके कार्यों का चयन एवं सम्मान किया जा चुका है। कोलकाता में प्राप्त यह अंतरराष्ट्रीय अवार्ड उनके दीर्घकालिक शोध, सृजनात्मक अनुशासन और सांस्कृतिक प्रतिबद्धता को वैश्विक स्तर पर मिली महत्वपूर्ण मान्यता के रूप में देखा जा रहा है।