कर्तव्य, संघर्ष और संकल्प की प्रेरक कहानी , अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर शासकीय सेवा में समर्पण की मिसाल -ज्योति बंजारे।

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तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस उन महिलाओं के सम्मान और प्रेरणा का प्रतीक है, जिन्होंने पारिवारिक, सामाजिक और व्यावसायिक जिम्मेदारियों के बीच संतुलन बनाते हुए अपने लक्ष्य हासिल किए। ऐसी ही एक सशक्त और प्रेरणादायी व्यक्तित्व हैं ज्योति बंजारे, जो वर्तमान में छत्तीसगढ़ महानदी भवन मंत्रालय में निज सहायक (Personal Assistant) के पद पर पदस्थ हैं और निरंतर शासकीय सेवा में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।उनकी शासकीय सेवा की शुरुआत वर्ष 2013 में धमतरी कलेक्टोरेट से स्टेनोग्राफर के पद पर हुई। इससे पूर्व उन्होंने मंत्रालय की परीक्षा उत्तीर्ण की थी, जिसमें उनका चयन स्टेनोग्राफर पद पर हुआ। धमतरी में 1 वर्ष 6 माह की सेवा के पश्चात वर्ष 2014 में उन्होंने मंत्रालय में कार्यभार ग्रहण किया और तब से लेकर आज तक लगभग 12 वर्षों से अधिक समय से वे निरंतर निष्ठा, ईमानदारी और कर्तव्यपरायणता के साथ शासकीय सेवा में कार्यरत हैं।विशेष उल्लेखनीय है कि उनका चयन दुर्ग जिला न्यायालय में क्लर्क पद तथा धमतरी कलेक्टोरेट में स्टेनोग्राफर पद दोनों स्थानों पर हुआ था। प्रशासनिक सेवा के क्षेत्र में बेहतर अवसर और अनुभव को ध्यान में रखते हुए उन्होंने धमतरी कलेक्टोरेट को चुना और वहीं से अपने प्रशासनिक करियर की सुदृढ़ नींव रखी।महज 21 वर्ष की आयु में विवाह होने के बाद भी ज्योति बंजारे ने अपनी शिक्षा को कभी बाधित नहीं होने दिया। संयुक्त परिवार की जिम्मेदारियों को निभाते हुए, ससुराल में रहकर उन्होंने निरंतर अध्ययन किया और स्नातक, पॉलिटेक्निक तथा स्नातकोत्तर (PG) जैसी उच्च शैक्षणिक उपलब्धियाँ प्राप्त कीं। बच्चों के जन्म के बाद भी उन्होंने अपने लक्ष्य से समझौता नहीं किया और निरंतर परिश्रम करते हुए आगे बढ़ती रहीं।संयुक्त परिवार में रहते हुए बुजुर्गों की सेवा, बच्चों की परवरिश और शासकीय दायित्वों का निर्वहन इन सभी को संतुलित करना आसान नहीं होता, किंतु ज्योति बंजारे ने यह सिद्ध कर दिखाया कि दृढ़ इच्छाशक्ति और अनुशासन से हर चुनौती को अवसर में बदला जा सकता है।अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर ज्योति बंजारे की यह जीवन-यात्रा उन सभी महिलाओं के लिए प्रेरणास्रोत है, जो अपने सपनों को जिम्मेदारियों की भीड़ में दबने नहीं देना चाहतीं। उनका संघर्ष और समर्पण यह संदेश देता है कि नारी जब ठान ले, तो वह हर भूमिका में उत्कृष्टता हासिल कर सकती है।


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