जंगलों की प्रहरी, नारी शक्ति की पहचान- ग्रीष्मी चांद।

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तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर यदि नारी सशक्तिकरण को कर्म और कर्तव्य की कसौटी पर परखा जाए, तो गौरेला–पेंड्रा–मरवाही जिले के मरवाही वन मंडल की आईएफएस 2020 बैच की अधिकारी, वन मंडलाधिकारी ग्रीष्मी चांद एक सशक्त और प्रेरणादायी उदाहरण के रूप में सामने आती हैं।*वन प्रशासन में संवेदनशील और दृढ़ नेतृत्व* ग्रीष्मी चांद ने मरवाही जैसे वनबहुल और संवेदनशील क्षेत्र में पदस्थ होकर यह सिद्ध किया है कि प्रशासनिक दृढ़ता और मानवीय संवेदना साथ-साथ चल सकती हैं। वन संरक्षण, अवैध कटाई पर नियंत्रण, वन्यजीव सुरक्षा और पर्यावरण संतुलन को लेकर उनकी सक्रियता ने मरवाही वन मंडल को नई दिशा दी है।*वनवासी समाज के साथ विश्वास का रिश्ता*एक महिला अधिकारी के रूप में ग्रीष्मी चांद ने वनांचलवासियों, विशेषकर आदिवासी समुदाय और महिलाओं से संवाद और सहयोग का सेतु बनाया। वन अधिकार, आजीविका संरक्षण और जागरूकता अभियानों के माध्यम से उन्होंने यह संदेश दिया कि वन विभाग केवल नियंत्रणकारी संस्था नहीं, बल्कि समन्वय और संरक्षण का साथी है।*साहसिक निर्णय और प्रशासनिक स्पष्टता*कठिन परिस्थितियों में भी निष्पक्ष निर्णय लेना, नियमों के साथ मानवीय दृष्टिकोण अपनाना और दबावों से ऊपर उठकर कार्य करना, यह उनकी कार्यशैली की पहचान है। यही कारण है कि मरवाही वन मंडल में उनका नेतृत्व अनुशासन, पारदर्शिता और कार्यकुशलता का प्रतीक बन चुका है।*महिला दिवस पर सशक्त संदेश*अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर आईएफएस ग्रीष्मी चांद का कार्य यह स्पष्ट करता है कि जब महिलाएँ प्रकृति की रक्षा का दायित्व संभालती हैं, तो आने वाली पीढ़ियों का भविष्य सुरक्षित होता है। मरवाही वन मंडल में उनका योगदान केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि पर्यावरण, समाज और नारी शक्ति के आत्मविश्वास का सशक्त प्रतीक है।


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