धधकते जंगलों के बीच बेबस तंत्र: मरवाही वनमंडल में आग का कहर, कारणों पर उठे सवाल।

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गौरेला -पेंड्रा-मरवाही, नूर मोहम्मद, ब्यूरो चीफ सर्वव्यापी

गर्मी की शुरुआत के साथ ही मरवाही वनमंडल के जंगल इन दिनों भीषण आग की चपेट में हैं। हालात ऐसे बन गए हैं कि एक-दो नहीं, बल्कि कई वन क्षेत्र लगातार धधक रहे हैं। दूर-दूर तक उठता धुआं और जलते पेड़ों की तस्वीरें वन विभाग की तैयारियों पर सवाल खड़े कर रही हैं।जानकारी के अनुसार, कोटमी, बरबसपुर, घटबहरा, परसदा, पेंड्रा और आसपास के कई इलाकों में आग तेजी से फैल रही है। सूखे मौसम और तेज गर्मी ने स्थिति को और भयावह बना दिया है। जंगलों में लगी आग से न केवल वन संपदा को भारी नुकसान हो रहा है, बल्कि वन्य जीवों के प्राकृतिक आवास भी प्रभावित हो रहे हैं।स्थानीय लोगों का कहना है कि जब तक वन विभाग की टीम मौके पर पहुंचती है, तब तक आग काफी फैल चुकी होती है। कई बार आग इतनी विकराल हो जाती है कि उसे नियंत्रित करना मुश्किल हो जाता है। विभाग द्वारा लगातार प्रयास किए जाने के बावजूद संसाधनों और समय पर कार्रवाई की कमी साफ दिखाई दे रही है।इस बीच आग लगने के कारणों को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आ रही है कि कुछ स्थानों पर ग्रामीणों द्वारा जंगल की सफाई के लिए आग लगाई जाती है, जो बाद में अनियंत्रित होकर बड़े क्षेत्र को अपनी चपेट में ले लेती है। वहीं, कुछ स्थानीय लोगों का आरोप है कि तेंदूपत्ता संग्रहण से पहले जानबूझकर आग लगाई जाती है, ताकि पुराने पत्ते जल जाएं और नई पत्तियों की गुणवत्ता बेहतर हो सके, जिससे उनकी कीमत और मांग बढ़ती है।विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार बढ़ते तापमान और सूखे हालात आग को और अधिक फैलने में मदद कर रहे हैं। यदि समय रहते ठोस और प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले दिनों में स्थिति और गंभीर हो सकती है।मरवाही वनमंडल में फैली यह आग न केवल पर्यावरण के लिए खतरा बन गई है, बल्कि यह प्रशासनिक व्यवस्था की तैयारियों और जवाबदेही पर भी बड़ा सवाल खड़ा कर रही है। अब देखना यह होगा कि वन विभाग इस चुनौती से निपटने के लिए क्या ठोस कदम उठाता है और कब तक इन धधकते जंगलों पर काबू पाया जा सकेगा।


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