तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी
गर्मी की दस्तक के साथ ही बिलासपुर जिले में जल संकट ने विकराल रूप लेना शुरू कर दिया है। नगर निगम बिलासपुर द्वारा किए जा रहे जल आपूर्ति के दावे जमीनी हकीकत में पूरी तरह फेल नजर आ रहे हैं। शहर के कई वार्डों में नियमित जल आपूर्ति बाधित है, जिससे लोगों को रोजमर्रा की जरूरतों के लिए भी जूझना पड़ रहा है। हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि टैंकरों के माध्यम से की जा रही आपूर्ति भी अव्यवस्थित और अपर्याप्त साबित हो रही है।नगर निगम का टैंकर सिस्टम, जिसे आपातकालीन व्यवस्था के रूप में लागू किया गया था, अब खुद सवालों के घेरे में है। कई क्षेत्रों में समय पर टैंकर नहीं पहुंच रहे, तो कहीं पानी की मात्रा ही जरूरत के मुकाबले बेहद कम है। इससे नागरिकों में भारी नाराजगी देखी जा रही है।शहर से लगे ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति और भी गंभीर है। यहां गर्मी की शुरुआत के साथ ही हैंडपंप और बोरवेल सूखने लगे हैं, जिससे ग्रामीणों को दूर-दराज के जल स्रोतों पर निर्भर रहना पड़ रहा है। जल संकट का सीधा असर जनजीवन पर पड़ रहा है और आने वाले दिनों में यह समस्या और गहराने की आशंका जताई जा रही है।इस संकट के पीछे एक बड़ी वजह अनियंत्रित बोर खनन भी है। शहर और उससे लगे ग्रामीण इलाकों की निजी कॉलोनियों में बिना किसी अनुमति और नियंत्रण के बड़े पैमाने पर बोर खनन किया जा रहा है। कई स्थानों पर तो हर घर में बोरवेल खुदवाए जा रहे हैं, जिससे भूजल स्तर तेजी से नीचे जा रहा है। इस पर रोक लगाने के लिए अब तक कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है।विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इसी तरह अनियंत्रित दोहन जारी रहा, तो आने वाले समय में जल संकट और भी भयावह रूप ले सकता है। ऐसे में जल संरक्षण और भूजल प्रबंधन को लेकर ठोस नीति बनाना बेहद जरूरी हो गया है।अब निगाहें जिला प्रशासन पर टिकी हैं। कलेक्टर संजय अग्रवाल से अपेक्षा की जा रही है कि वे इस गंभीर समस्या को प्राथमिकता में रखते हुए ठोस और सख्त फैसले लें। अनधिकृत बोर खनन पर तत्काल रोक, जल आपूर्ति व्यवस्था में सुधार और दीर्घकालिक जल प्रबंधन की दिशा में प्रभावी कदम उठाना समय की मांग बन गया है। यदि जल्द ही कोई ठोस पहल नहीं की गई, तो बिलासपुर में जल संकट आने वाले दिनों में जनजीवन को पूरी तरह प्रभावित कर सकता है।