मूल निवासी संघ द्वारा राज्यपाल को ज्ञापन सौंपा गया।

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तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी

यह ज्ञापन पत्र मूल निवासी संघ द्वारा महामहिम राज्यपाल महोदय को संबोधित किया गया है, जो छत्तीसगढ़ के राजभवन रायपुर में स्थित है। पत्र का विषय पिछड़ा वर्ग के 27% आरक्षण (अधिकार) से संबंधित है, जो छत्तीसगढ़ धार्मिक स्वतंत्रता संशोधन विधेयक 2026 से जुड़ा हुआ है।पत्र में उल्लेख किया गया है कि पिछड़ा वर्ग समाज (ओबीसी) के संवैधानिक प्रतिनिधित्व के लिए 02 दिसंबर 2022 को छत्तीसगढ़ विधानसभा में कैबिनेट द्वारा बहुमत से 27% आरक्षण विधेयक छत्तीसगढ़ लोक सेवा (एसटी, एससी, ओबीसी) के लिए संशोधन विधेयक 2026 पारित करके आपके समक्ष भेजा गया था। इससे पिछड़ा वर्ग समाज जो एक बड़ा वर्ग ओबीसी है जो कि अपने राजकीय प्रतिनिधित्व से वंचित है, जिससे ओबीसी समाज व वर्ग की बड़ी क्षति हो रही है।पत्र में आगे कहा गया है कि महामहिम जी वर्तमान में छत्तीसगढ़ विधानसभा में धर्मांतरण विरोधी कानून 19 मार्च को लाया गया था और बहुमत से पास कर आपके समक्ष भेजा जा रहा है, जिससे यह पूर्व कानून के रूप में पूर्व 1968 के कानून को प्रतिस्थापित करता है, जिसका प्रमुख उद्देश्य धर्म, प्रलोभन, धमकी-धमकी, अनुचित प्रभाव,विभ्रम एवं संविधान के माध्यम से धर्मपरिवर्तन पर रोक लगाना है, जिसके तहत सभी अपराध संज्ञेय एवं गैर जमानती हैं।पत्र के अंत में सादर कार्यवाही बावत आपके समक्ष प्रस्तुत सधन्यवाद लिखा हुआ है, और इसे अमरजीत पटेल, प्रदेश अध्यक्ष, मूल निवासी संघ छत्तीसगढ़ द्वारा हस्ताक्षरित किया गया है। यह जानकारी छत्तीसगढ़िया सर्व समाज एवं SC ST OBC MIN महासंघ छग प्रदेश अध्यक्ष श्याम मूरत कौशिक ने विज्ञप्ति जारी कर दी है। तथा बताया है कि इस संबंध में आगे की रणनीति बनाने हेतु 23 मार्च को दुर्ग में ओबीसी नेताओं की बैठक रखी गई है।


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