तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी
राष्ट्रभाषा प्रचार समिति के 32 वें अखिल भारतीय प्रचार सम्मेलन में बतौर मुख्य अतिथि संबोधित करते हुए वर्धा नगर परिषद के अध्यक्ष सुधीर पांगुळ ने कहा है कि हिन्दी ने सभी भाषाओं को एक धागे में पिरोया है। उन्होंने बताया कि वे राष्ट्र भाषा प्रचार समिति के विद्यार्थी रहे हैं। वर्धा गांधी की कर्मभूमि है और यहां से उन्होंने आजादी का बिगुल बजाया। उन्होंने आग्रह किया कि हिन्दी को घर-घर में अपनाना चाहिए। 29 मार्च को यह सम्मेलन आयोजित किया गया। इस अवसर पर ‘प्रशासन में हिन्दी’ विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। राष्ट्रभाषा प्रचार समिति के अध्यक्ष प्रो. सूर्यप्रसाद दीक्षित ने कहा किभाषा का प्रयोजन बोलचाल, दैनिक कामकाज, रचनात्मक लेखन, पाठन, संचार और राजभाषा इन छह क्षेत्रों में होता है। प्रशासन में हिंदी यह सातवाँ क्षेत्र है। केन्द्र, राज्य सरकार, पब्लिक सेक्टर और स्वायत्त संस्थाओं का प्रशासन व उनकी भाषा नीति अलग-अलग है और उनकी समस्या भी अलग-अलग है। केन्द्र सरकार ने व्यवस्था की है कि देवनागरी लिपि में लिखी संघ की राजभाषा हो। इस मशीनी युग में अपने मोबाईल पर ही अलग अलग शब्दों के अर्थ बताये जाते हैं। इतना ही नहीं मशीनी अनुवाद भी होता है। आप समानान्तर अंग्रेजी में बोलते चले जाइए, हिन्दी अनुवाद होता चला जाएगा। आप भारत की 22 भाषाओं में से किसी भी भाषाओं में बोलिए समानान्तर अनुवाद होता जाएगा। जब आप अपनी भाषा में बोलते हैं, उसी को जनपदीय बोली में बोलने लग जाये तो ठीक से अनुवाद नहीं हो पायेगा, वह वजन नहीं आ पायेगा। संगोष्ठी में पुणे से सुविख्यात साहित्यकार व अनुवादविद् डॉ. दामोदर खडसे तथा डॉ. सुनील देवधर, नागपुर से डॉ. मनोजकुमार पाण्डेय, राष्ट्रभाषा प्रचार समिति के प्रधान मंत्री डॉ. हेमचन्द्र वैद्य, डॉ. महेश अग्रवाल, प्रकाश बाभले एवं छत्रपाल धाबर्डे मंचस्थ थे। प्रधान मंत्री डॉ. हेमचन्द्र वैद्य ने प्रास्ताविक भाषण में कहा कि विद्यार्थियों के लिए नये-नये उपक्रम प्रारंभ किये। उनमें से एक है ‘काते सो पहने’। विद्यार्थी चरखे पर सूत कातते हैं और उस सूत से बुना हुआ कपड़ा हम उन्हें देते हैं। डॉ. दामोदर खडसे ने संबोधित करते हुए कहा कि हमारी सबसे बड़ी उपलब्धि यह रही कि हमारे यहाँ आर्यभट्ट ने शून्य की खोज की। इस शून्य का इतना महत्त्व है कि उसके सिवा कम्प्यूटर भी उसकी गणना एवं प्रोग्राम नहीं चला सकता। इस शून्य ने पूरे विश्व को नई दिशा दी। इस शून्य के साथ-साथ हमारे सारे अंक पूरी दुनिया में गये। उन्होंने 343 से लेकर 351 की धाराओं को विस्तार से समझाया। हिन्दी में साहित्य रचनाओं के लिए शब्द बहुत है लेकिन तकनीकी शब्दों के लिए हमारे पास शब्द नहीं मिलते। इसके लिए तकनीकी शब्दावली बनाने के लिए भारत सरकार ने एक समिति का गठन किया है। उन्होंने आगे कहा कि हमें हमारे मनोविज्ञान को बदलने की जरूरत है और उन्हें भरोसा देना आवश्यक है कि हम हमारी भाषा में काम करके भी आगे जा सकते हैं। नागपुर विश्वविद्यालय के हिन्दी विभागाध्यक्ष डॉ. मनोजकुमार पाण्डेय ने कहा कि गांधीजी के विचार से जब तक पूरा देश एक भाषा में बात नहीं करेगा तब तक हम एक नहीं हो सकते। हमारा देश बहुभाषी है। राजभाषा को संविधान में लागू किया। प्रशासनिक क्षेत्र में कार्य करनेवाले लोगों की उपयोगिता से इस स्थिति को आगे बढ़ाया जा सकता है। राष्ट्रभाषा प्रचार समिति, पुणे के कार्याध्यक्ष डॉ. सुनिल देवधर ने कहा कि महाराष्ट्र से पूरे देश को जोड़ने का काम हो रहा है। भाषा को शब्दों में नहीं पढ़ा जा सकता, उसे अपनी मानसिकता, भावना, दृष्टि, स्थिति और परिस्थिति से पढ़ा जाता है। भाषा शब्दों तक सीमित नहीं होती। भाषा अपनी लिपि में समर्थ है। परिभाषी शब्दों की हमारे पास कोई कमी नहीं है, लेकिन हम खोज नहीं पाते। प्रत्येक भाषा की अपनी संस्कृति होती है। भाषा एक सतत प्रवाह है जिससे भाषा टिकती है। जिस प्रदेश की अपनी संस्कृति होती है उसी तरह के शब्द उसमें प्रवाहित होते हैं। जब तक भाषा के बोलनेवाले रहेंगे तब तक भाषा जीवित रहेगी। दीप प्रज्ज्वलन एवं महात्मा गांधी की प्रतिमा को माल्यार्पण कर कार्यक्रम का प्रारंभ किया गया। उत्तर व पूर्वांचल की छात्राओं ने स्वागत गीत ‘मन में गूंजी ध्वनि…’ एवं ‘भारत जननी एक हृदय हो.. प्रस्तुत किया। कोलकाता की स्मृति बैनर्जी एवं समूह ने भारत तीर्थो एकला चलो रे गीत बंगाली में सुमधुर ध्वनि में प्रस्तुत किया। इस दौरान विभिन्न प्रान्तों से राष्ट्रभाषा हिन्दी की उत्कृष्ट सेवा करने वाले प्रचारकों, हिन्दी सेवियों का पुष्पगुच्छ, स्मृति चिह्न, शाल तथा प्रमाणपत्र देकर सम्मान किया गया।अहमदाबाद से शरद जोशी की पुस्तक ‘हिन्दी के आस पास’ का लोकार्पण किया गया। कार्यक्रम का संचालन राष्ट्रभाषा महाविद्यालय की प्राचार्या पूजा लोहिया ने किया तथा प्रकाश बाभले ने आभार व्यक्त किये। समारोह में असम से मदन गुप्ता, अंजना सभापंडित, एड्. प्रवीरकुमार गुहराय, मुंबई से इंद्रकुमार जैन, मणिपुर से यूमनाम कुमार सिंह तथा चाओबा, गुजरात से शरद जोषी, अमित जोषी, रावल, हीना शाह, सोलापुर से बंडोपंत पाटील, नागपुर से बंडू रक्षक, इन्दौर से अखिलेश राव, वर्धा से मुरलीधर बेलखोडे, महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय के जनसंपर्क अधिकारी बी. एस. मिरगे,समिति के कोषाध्यक्ष प्रा. विजय व्यास सहित गुरुदेव सेवा मंडल के कार्यकर्ता एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित थे। राष्ट्रगान के साथ समारोह संपन्न हुआ।