चरणबद्ध तरीके से हुआ छत्तीसगढ़ के जिलों का गठन।

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तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी

छत्तीसगढ़ राज्य के प्रशासनिक विकास की झलक एक रोचक नक्शे के माध्यम से सामने आई है, जिसमें अलग-अलग समय में बने जिलों के गठन वर्ष को दर्शाया गया है। इस नक्शे से स्पष्ट होता है कि राज्य में जिला गठन की प्रक्रिया एक ही समय में नहीं, बल्कि कई चरणों में हुई है।नक्शे के अनुसार, प्रदेश के कुछ प्रमुख जिले जैसे रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग, रायगढ़ और बस्तर का गठन वर्ष 1861 और 1948 के आसपास का बताया गया है, जो राज्य के पुराने प्रशासनिक ढांचे को दर्शाते हैं। वहीं, कोरबा, जांजगीर-चांपा, धमतरी, कांकेर जैसे जिले 1998 में अस्तित्व में आए, जब प्रशासनिक विस्तार की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया।इसके बाद 2012 में जिले गठन की एक और बड़ी लहर देखने को मिली, जिसमें बलौदाबाजार, गरियाबंद, मुंगेली, बेमेतरा, कोंडागांव, सुकमा, बलरामपुर और सूरजपुर जैसे नए जिले बनाए गए। इससे स्थानीय प्रशासन को और अधिक सशक्त बनाने की कोशिश की गई।हाल ही के वर्षों में भी यह सिलसिला जारी रहा। 2020 में गौरेला-पेंड्रा-मरवाही (GPM) और 2022 में मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई (KCG) और सक्ती, सारंगढ़-बिलाईगढ़, मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (MCB) जैसे नए जिलों का गठन किया गया, जिससे राज्य में कुल जिलों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई।यह नक्शा बताता है कि छत्तीसगढ़ में प्रशासनिक इकाइयों का विस्तार समय-समय पर जनता की जरूरतों और सुशासन की दिशा में उठाए गए कदमों का परिणाम है। विशेषज्ञों का मानना है कि नए जिलों के गठन से शासन की पहुंच गांव-गांव तक मजबूत हुई है और विकास कार्यों में तेजी आई है। छत्तीसगढ़ में जिलों का गठन एक निरंतर प्रक्रिया रही है, जो राज्य के विकास, प्रशासनिक सुविधा और जनहित को ध्यान में रखते हुए समय-समय पर की जाती रही है। यह नक्शा उसी विकास यात्रा का जीवंत दस्तावेज है।


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