विकास नंद/ सर्वव्यापी/

छत्तीसगढ़ में कुपोषण के खिलाफ चल रहे जन-आंदोलन को और मजबूत बनाने के लिए 9 से 23 अप्रैल तक 8वां पोषण पखवाड़ा आयोजित किया जाएगा। भारत सरकार के महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा मिशन पोषण 2.0 के तहत आयोजित इस अभियान का उद्देश्य जन-भागीदारी के माध्यम से “कुपोषण मुक्त भारत” के संकल्प को सशक्त करना है।
इस वर्ष पखवाड़ा की थीम “जीवन के पहले छह वर्षों में मस्तिष्क के विकास को अधिकतम करना” रखी गई है, जो बच्चों के शुरुआती वर्षों में पोषण, स्वास्थ्य और समुचित देखभाल के महत्व को रेखांकित करती है। विशेषज्ञों के अनुसार, जीवन के पहले छह वर्ष बच्चे के शारीरिक, मानसिक और बौद्धिक विकास की नींव होते हैं, इसलिए इस दौरान संतुलित पोषण बेहद आवश्यक है।
वर्ष 2018 से संचालित पोषण अभियान को जन-आंदोलन के रूप में आगे बढ़ाया जा रहा है, जिसमें जन-जागरूकता और व्यवहार परिवर्तन पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
इसी क्रम में इस बार का पोषण पखवाड़ा भी सामुदायिक भागीदारी को केंद्र में रखकर आयोजित होगा।अभियान के सफल क्रियान्वयन के लिए 7 अप्रैल को राज्य स्तर पर विभिन्न विभागों के नोडल अधिकारियों की बैठक आयोजित की गई, जिसमें महिला एवं बाल विकास, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, स्कूल शिक्षा, नगरीय प्रशासन, कृषि, खाद्य, आयुष, जल संसाधन और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन सहित कई विभागों के अधिकारियों ने भाग लिया।
सभी विभागों को अपनी कार्ययोजना तैयार कर सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।पोषण पखवाड़ा के दौरान प्रदेश के सभी आंगनबाड़ी केंद्रों में विविध गतिविधियाँ आयोजित होंगी। इनमें बच्चों और गर्भवती महिलाओं की स्वास्थ्य जांच, पोषण परामर्श, अन्नप्राशन, गोदभराई तथा स्वच्छता और संतुलित आहार के प्रति जागरूकता कार्यक्रम शामिल हैं। साथ ही स्थानीय खाद्य पदार्थों के उपयोग को बढ़ावा देकर पोषण व्यवहार में सकारात्मक बदलाव लाने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
यह अभियान न केवल बच्चों के सर्वांगीण विकास को बढ़ावा देगा, बल्कि समाज में पोषण के प्रति जागरूकता और जिम्मेदारी की भावना को भी मजबूत करेगा। राज्य में कुपोषण दर में कमी लाने और मातृ-शिशु स्वास्थ्य संकेतकों में सुधार लाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
राज्य सरकार ने सभी विभागों, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और आम नागरिकों से अपील की है कि वे इस अभियान को जन-आंदोलन के रूप में सफल बनाने में सक्रिय भूमिका निभाएं, ताकि “सुपोषित छत्तीसगढ़” का लक्ष्य साकार हो सके।