तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी
छत्तीसगढ़ के आदिवासी विकास विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा एक ऐसे वरिष्ठ आईएएस अधिकारी के रूप में उभरे हैं, जिन्होंने अपनी प्रशासनिक क्षमता, दूरदर्शिता और कर्तव्यनिष्ठा के बल पर हर जिम्मेदारी को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है। अपने अब तक के सेवाकाल में वे जिन-जिन पदों पर पदस्थ रहे, वहां उन्होंने न केवल व्यवस्थाओं को सुदृढ़ किया बल्कि संबंधित विभागों को नई पहचान दिलाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।आदिवासी विकास विभाग में उनके नेतृत्व का प्रभाव स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। उन्होंने विभागीय योजनाओं को केवल कागजी प्रक्रिया तक सीमित न रखकर उन्हें जमीनी स्तर तक पहुंचाने पर जोर दिया है। उनकी पहल से शिक्षा, स्वास्थ्य और आजीविका से जुड़ी योजनाओं का लाभ दूरस्थ आदिवासी अंचलों तक पहुंच रहा है, जिससे वहां के जीवन स्तर में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिल रहा है। उनकी कार्यशैली का मुख्य आधार पारदर्शिता, जवाबदेही और परिणाममुखी कार्यप्रणाली है, जिसने विभाग की छवि को मजबूत किया है।इसी क्रम में नवा रायपुर में निर्मित भव्य आदिवासी संग्रहालय सोनमणि बोरा की दूरदर्शी सोच का जीवंत उदाहरण बनकर सामने आया है। इस संग्रहालय ने छत्तीसगढ़ की समृद्ध आदिवासी संस्कृति, परंपरा और इतिहास को एक अंतरराष्ट्रीय मंच प्रदान किया है। यहां प्रदर्शित विरासत न केवल देशभर से आने वाले पर्यटकों को आकर्षित कर रही है, बल्कि विदेशी आगंतुकों के लिए भी यह एक प्रमुख आकर्षण का केंद्र बन चुका है। इस पहल के माध्यम से छत्तीसगढ़ के आदिवासी समुदाय की पहचान वैश्विक स्तर पर और अधिक सशक्त हुई है।इस संग्रहालय का अवलोकन करते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी इसकी सराहना की और सोनमणि बोरा के प्रयासों की खुलकर प्रशंसा की। प्रधानमंत्री की यह सराहना इस बात को प्रमाणित करती है कि विभाग द्वारा किए जा रहे नवाचार और कार्य राष्ट्रीय स्तर पर भी प्रभाव छोड़ रहे हैं।सोनमणि बोरा की प्रशासनिक सोच में आधुनिक तकनीक का समावेश भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। उन्होंने विभागीय कार्यों में तकनीकी नवाचार को बढ़ावा देकर योजनाओं की निगरानी और क्रियान्वयन को अधिक प्रभावी बनाया है। साथ ही अधिकारियों और कर्मचारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने कर्तव्यों के प्रति सजग रहते हुए आमजन के प्रति संवेदनशीलता बनाए रखें।समग्र रूप से देखा जाए तो सोनमणि बोरा एक ऐसे प्रशासक के रूप में स्थापित हुए हैं, जिन्होंने अपने कार्यों से आदिवासी विकास विभाग को नई दिशा देने के साथ-साथ उसे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विशिष्ट पहचान दिलाई है। नवा रायपुर का आदिवासी संग्रहालय उनकी इसी दूरदर्शी सोच और प्रतिबद्धता का प्रतीक है, जो आज छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक समृद्धि का परचम विश्वभर में लहरा रहा है।