छत्तीसगढ़ वन विभाग में पीसीसीएफ नियुक्ति पर सियासी साया? सेवानिवृत्ति से पहले “सौदेबाजी” के आरोपों ने बढ़ाई हलचल।

Share Now

तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी

छत्तीसगढ़ के वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग में शीर्ष पद प्रधान मुख्य वन संरक्षक (PCCF) की आगामी नियुक्ति को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। विभाग के वर्तमान मुखिया व्ही. श्रीनिवास राव के मई महीने में सेवानिवृत्त होने से पहले ही कथित तौर पर नए PCCF की नियुक्ति को लेकर अंदरखाने तेज हलचल शुरू हो गई है।विभागीय और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के विश्वसनीय सूत्रों के हवाले से दावा किया जा रहा है कि इस नियुक्ति के लिए करोड़ों रुपये के लेन-देन की चर्चा चल रही है। उपरोक्त सूत्रों के अनुसार, एक वरिष्ठ अफसर से जुड़े नेटवर्क के माध्यम से एक संघ से जुड़े नेता ने एक वन अधिकारी को PCCF बनाने के लिए कथित तौर पर “सौदा” तय किया।सूत्रों का यह भी कहना है कि होली पर्व से ठीक पहले संबंधित अधिकारी तक “होली मनाने” के नाम पर लगभग दो लाख रुपये पहुंचाए गए। आरोप यह भी है कि शेष रकम का उपयोग कथित तौर पर संबंधित नेता द्वारा किया गया। हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम में एक नया मोड़ तब आया जब वही वन अधिकारी, जिसके PCCF बनने की चर्चा है, अब दावा कर रहा है कि वह बिना किसी “भेंट-चढ़ावे” के ही इस पद पर नियुक्त हो जाएगा।इस बीच, सूत्रों के मुताबिक, कथित तौर पर इस सौदे में शामिल बताए जा रहे RSS से जुड़े नेता ने दिल्ली का रुख किया है और वहां उच्च स्तर पर संपर्क साधने की कोशिशें जारी हैं। साथ ही, उस वन अधिकारी के खिलाफ भी कुछ जानकारी सामने लाई जा रही है, जो PCCF बनने की दौड़ में शामिल बताया जा रहा है।इस पूरे मामले ने विभागीय गलियारों में असमंजस और आशंका का माहौल पैदा कर दिया है। जहां एक ओर ईमानदार अधिकारियों में नाराजगी देखी जा रही है, वहीं दूसरी ओर यह सवाल भी उठने लगे हैं कि क्या राज्य के सबसे महत्वपूर्ण वन पद की नियुक्ति पारदर्शिता के साथ होगी या फिर यह विवाद और गहराएगा।हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हो पाई है। न तो विभाग की ओर से और न ही संबंधित संगठनों या अधिकारियों की ओर से इस पर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया सामने आई है।ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या इन गंभीर आरोपों की जांच होगी? क्या सरकार इस मामले में हस्तक्षेप कर पारदर्शिता सुनिश्चित करेगी? और सबसे अहम, क्या छत्तीसगढ़ को उसका अगला PCCF योग्यता के आधार पर मिलेगा या विवादों के बीच तय होगा?फिलहाल, पूरे मामले पर प्रदेश की नजरें टिकी हुई हैं और आने वाले हफ्तों में स्थिति साफ होने की उम्मीद की जा रही है।


Share Now

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You cannot copy content of this page

error: Content is protected !!