वर्धा/ बिलासपुर / तरुण कौशिक/ संपादक सर्वव्यापी/ महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय में उत्तरपूर्वी छात्र समूह की ओर से बुधवार, 12 मार्च को कस्तूरबा सभागार में उत्तरपूर्वी भारत की संस्कृति का प्रदर्शन कार्यक्रम का उद्घाटन कुलपति प्रो. कुमुद शर्मा ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। अपने आशीर्वचन में कुलपति ने कहा कि भारत का उत्तर पूर्वी क्षेत्र अपने प्राकृतिक सौदर्य, हरियाली और पहाडों के कारण सबको आकर्षित और आनंदित करता है। उन्होंने कहा कि हम एक जैसी ही परांपराओं में विश्वास करते हैं। हमारे नियम और इतिहास बोध एक जैसे ही हैं। अनेकता में एकता और वैविध्य का केंद्र भी एक जैसा है, चाहे पूर्वोत्तर हो या दक्षिण। विद्यार्थियों द्वारा सांस्कृतिक प्रस्तुतियों की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि एक से बढ़कर एक प्रस्तुतियों से सम्मोहित हुई हूँ। विद्यार्थियों के नृत्य और गीतोंने पूर्वोत्तर को जिवंत बना दिया है। इससे संस्कृति को निकट से जाना जा सकता है। कुलपति प्रो. कुमुद शर्मा के कार्यभार ग्रहण करने के बाद यह उनका पहला कार्यक्रम था,जिसमें खचाखच भरे सभागार में तालियों की गड़गड़ाहट के बीच विद्यार्थियों में उत्साह भर दिया। इस अवसर पर उत्तरपूर्वी छात्र समूह की ओर से पारंपरिक अंगवस्त्र एवं पुष्पगुच्छ देकर स्वागत किया। कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने नागालैण्ड का तितली लोकनृत्य, मिज़ोरम का बांस नृत्य प्रस्तुत कर समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की झलक दिखाई। कार्यक्रम के दौरान रजनीश कुमार शेखर और अदिबम ने उत्तरपूर्व के स्वतंत्रता सेनानियों का स्मरण करते हुए उनके योगदान का परिचय भी दिया। इस अवसर पर शिक्षा विभाग के डॉ. हेमचंद्र ससाने एवं डॉ. सुहासिनी बाजपेयी ने संबोधित करते हुए विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन किया। कार्यक्रम का संचालन के. पुलोंग व सरस्वती ने किया। कार्यक्रम का संयोजन शिक्षा विभाग के डॉ. हेमचंद्र ससाने, डॉ. धीरज मसराम व डॉ. प्रमोद जोशी ने किया।
इस अवसर पर मंच पर विधि विद्यापीठ के अधिष्ठाता प्रो. जनार्दन कुमार तिवारी, हिंदी साहित्य विभाग के एसोशिएट प्रो. अशोक नाथ त्रिपाठी, आतंरिक संपरीक्षा अधिकारी डॉ. पीयूष पतंजलि उपस्थित थे। कार्यक्रम में अध्यापन, शोधार्थी तथा विद्यार्थी बड़ी संख्या में उपस्थित थे।