विकास नंद/ सर्वव्यापी

छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. किरणमयी नायक तथा सदस्य सरला कोसरिया, ओजस्वी मंडावी और दीपिका शोरी ने बुधवार को महिला उत्पीड़न से जुड़े विभिन्न प्रकरणों की सुनवाई की। सुनवाई के दौरान कई मामलों का समाधान किया गया, वहीं एक संवेदनशील बच्चा चोरी प्रकरण की जांच के लिए आयोग ने विशेष पहल की है।सुनवाई के दौरान एक मामले में आवेदिका ने बताया कि उसकी डेढ़ वर्षीय पोती अपनी मां के साथ रहती है। आयोग के समक्ष दोनों पक्षों की सहमति से यह तय हुआ कि दादी और अन्य परिजन प्रत्येक माह एक बार बच्ची से उसके ननिहाल में मिल सकेंगे। साथ ही बच्ची के पिता द्वारा प्रतिमाह एक हजार रुपये भरण-पोषण राशि देने पर भी सहमति बनी। समझौते के बाद प्रकरण का निराकरण कर दिया गया।एक अन्य मामले में नगर निगम रायपुर के दिवंगत चौकीदार की पत्नी ने आयोग को बताया कि वर्ष 2016 में सेवा अवधि के दौरान उनके पति का निधन हो गया था। अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन देने के बावजूद आज तक परिवार के किसी सदस्य को नियुक्ति नहीं मिली। मामले की गंभीरता को देखते हुए महिला आयोग ने नगर निगम रायपुर में आवेदिका के पुत्र को अनुकंपा नियुक्ति देने की अनुशंसा करने का निर्णय लिया है।सुनवाई के दौरान एक अत्यंत संवेदनशील मामले में आवेदिका ने आरोप लगाया कि सरोगेसी के माध्यम से जन्मे उसके जुड़वा बच्चों में से पुत्र को अस्पताल द्वारा बदल दिया गया और उसकी जगह दूसरी बच्ची सौंप दी गई। आवेदिका का दावा है कि डीएनए जांच में बच्ची का जैविक संबंध उससे और उसके पति से नहीं पाया गया। उसने यह भी आशंका जताई कि उसका पुत्र दंतेवाड़ा के किसी आदिवासी परिवार को सौंप दिया गया है।मामले की गंभीरता को देखते हुए महिला आयोग ने अपने सदस्यों की एक टीम गठित करने का निर्णय लिया है। आयोग की सदस्यगण दंतेवाड़ा पहुंचकर कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक से मुलाकात करेंगी तथा डीएनए परीक्षण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए आवश्यक पहल करेंगी। आयोग का उद्देश्य मामले की सत्यता सामने लाना और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाना है।महिला आयोग ने स्पष्ट किया कि महिलाओं और बच्चों से जुड़े मामलों में संवेदनशीलता, निष्पक्षता और त्वरित न्याय सुनिश्चित करना उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है।