निर्माणाधीन सड़क बनी विवाद का कारण, गुणवत्ता पर सवाल—ग्रामीणों ने की शिकायत।

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तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी

बिलासपुर जिले के मस्तूरी ब्लॉक अंतर्गत आमाकोनी को अन्य गांवों से जोड़ने के लिए बनाई जा रही कच्ची सड़क को पक्की सड़क में तब्दील करने का कार्य इन दिनों विवादों में घिर गया है। लोक निर्माण विभाग की देखरेख में चल रहे इस निर्माण कार्य को लेकर ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने मोर्चा खोल दिया है। जनपद सदस्य मेनका सुमित के नेतृत्व में दर्जनों ग्रामीणों ने बिलासपुर कलेक्टर संजय अग्रवाल को लिखित शिकायत सौंपते हुए निर्माण में गंभीर अनियमितताओं का आरोप लगाया है।शिकायत में बताया गया है कि सड़क निर्माण के दौरान पानी की तराई पर्याप्त मात्रा में नहीं की जा रही है और मिट्टी की गुणवत्ता भी मानक के अनुरूप नहीं है। जहां लाल मुरूम का उपयोग किया जाना था, वहां स्थानीय भसवा मिट्टी का इस्तेमाल किया जा रहा है। इसके अलावा नाली निर्माण में भी भारी लापरवाही बरती जा रही है और सरिया नाम मात्र के लिए डाला जा रहा है।ग्रामीणों का आरोप है कि इस संबंध में कई बार संबंधित एसडीओ और इंजीनियर को मौखिक शिकायत की गई, लेकिन अधिकारियों ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। उल्टा, आंख मूंदकर ठेकेदार की लापरवाही को नजरअंदाज किया जा रहा है, जिससे भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिल रहा है।गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ सरकार प्रदेशभर में सड़क व्यवस्था सुधारने के लिए करोड़ों रुपए खर्च कर रही है, ताकि गांव-गांव तक बेहतर संपर्क स्थापित हो सके। लेकिन कुछ ठेकेदारों की लापरवाही इस मंशा पर पानी फेरती नजर आ रही है।मामला ग्राम पंचायत आमगांव के आश्रित ग्राम आमाकोनी का है, जहां बहतरा से आमाकोनी को जोड़ने वाली सड़क का चौड़ीकरण और पक्कीकरण कार्य जारी है। यह सड़क ग्रामीणों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि बारिश के दिनों में शिवनाथ नदी के उफान पर आने से गांव का संपर्क अन्य क्षेत्रों से पूरी तरह कट जाता है। ऐसे में यही सड़क आवागमन का एकमात्र साधन बनती है।ग्रामीणों की चिंता है कि यदि सड़क की नींव ही कमजोर रखी जाएगी, तो बारिश के दौरान यह सड़क बह जाएगी और फिर से वही पुराने हालात बन जाएंगे। उनका कहना है कि शासन लाखों रुपए खर्च कर रहा है, लेकिन यदि गुणवत्ता पर ध्यान नहीं दिया गया, तो यह राशि व्यर्थ साबित होगी।फिलहाल ग्रामीणों ने कलेक्टर से मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस शिकायत पर क्या रुख अपनाता है और कब तक ग्रामीणों को एक मजबूत और गुणवत्तापूर्ण सड़क मिल पाती है।


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