तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी
संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अम्बेडकर की जयंती के अवसर पर तखतपुर विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय से लगे ग्राम पंचायत छतौना में आयोजित ग्राम सभा ने प्रशासन और आमजन के बीच संवाद का एक सशक्त उदाहरण प्रस्तुत किया। इस अवसर पर बिलासपुर कलेक्टर संजय अग्रवाल ने औपचारिकता से परे जाकर पीपल पेड़ की छांव तले जमीन पर बैठकर ग्रामीणों की समस्याएं सुनीं और मौके पर ही कई मुद्दों के निराकरण के निर्देश दिए।ग्राम सभा का यह आयोजन केवल एक औपचारिक कार्यक्रम न होकर वास्तविक जनसुनवाई में तब्दील हो गया, जहां प्रशासनिक संवेदनशीलता और जवाबदेही स्पष्ट रूप से दिखाई दी। कलेक्टर संजय अग्रवाल का यह सहज और सरल व्यवहार ग्रामीणों के बीच विश्वास का वातावरण बनाने में सफल रहा। उन्होंने बिना किसी मंच या विशेष व्यवस्था के आम लोगों के बीच बैठकर यह संदेश दिया कि प्रशासन जनता के बीच है और उनकी समस्याओं के समाधान के लिए प्रतिबद्ध है।कार्यक्रम के दौरान ग्रामीणों ने पेयजल संकट, जर्जर सड़कों की मरम्मत, प्रधानमंत्री आवास योजना में पात्रता, राशन वितरण में अनियमितता, वृद्धावस्था पेंशन, स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी तथा शासकीय योजनाओं के लाभ से वंचित रहने जैसी विभिन्न समस्याएं कलेक्टर के समक्ष रखीं। कलेक्टर ने एक-एक समस्या को गंभीरता से सुना और संबंधित विभागों के अधिकारियों को मौके पर ही आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। कई मामलों में उन्होंने तत्काल निराकरण सुनिश्चित करने के लिए समयसीमा भी निर्धारित की।कलेक्टर संजय अग्रवाल ने स्पष्ट रूप से कहा कि शासन की मंशा है कि अंतिम व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचे और किसी भी पात्र हितग्राही को वंचित न रहना पड़े। उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि योजनाओं के क्रियान्वयन में लापरवाही या उदासीनता पाई गई, तो जिम्मेदारों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।इस अवसर पर जिला पंचायत सीईओ संदीप अग्रवाल ने पंचायत स्तर पर चल रहे विकास कार्यों की जानकारी देते हुए कहा कि ग्राम पंचायतों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए विभिन्न योजनाएं संचालित की जा रही हैं। उन्होंने ग्रामीणों से अपील की कि वे योजनाओं की जानकारी लें और सक्रिय रूप से भागीदारी निभाएं।ग्राम पंचायत की सरपंच राधिका राकेश कौशिक ने गांव की प्रमुख समस्याओं और विकास कार्यों का विस्तृत विवरण प्रस्तुत करते हुए कलेक्टर से आवश्यक सहयोग की अपेक्षा जताई। उन्होंने कहा कि प्रशासन का इस प्रकार गांव में आकर सीधे संवाद करना ग्रामीणों के लिए प्रेरणादायक है और इससे समस्याओं के समाधान में तेजी आती है।अंबेडकर जयंती के इस अवसर पर कलेक्टर ने बाबा साहेब के विचारों को स्मरण करते हुए कहा कि डॉ. भीमराव अम्बेडकर ने जो संविधान हमें दिया है, वह समानता, न्याय और अधिकारों की गारंटी देता है। प्रशासन का दायित्व है कि वह इन मूल्यों को जमीनी स्तर पर लागू करे और हर नागरिक को उसका अधिकार दिलाए।ग्राम सभा में महिलाओं की उल्लेखनीय भागीदारी देखने को मिली। बड़ी संख्या में उपस्थित महिलाओं ने खुलकर अपनी समस्याएं रखीं, जिस पर कलेक्टर ने विशेष संवेदनशीलता दिखाते हुए महिला एवं बाल विकास, स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी समस्याओं के त्वरित समाधान के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि महिलाओं का सशक्तिकरण ही गांव और समाज के समग्र विकास की कुंजी है।कार्यक्रम के दौरान अधिकारियों ने विभिन्न शासकीय योजनाओं की जानकारी भी दी और पात्र हितग्राहियों का मौके पर ही पंजीयन करने की प्रक्रिया प्रारंभ की गई। इससे ग्रामीणों में उत्साह का माहौल देखने को मिला और प्रशासन के प्रति विश्वास और मजबूत हुआ।इस पूरी ग्राम सभा की सबसे विशेष बात यह रही कि प्रशासनिक अमला पूरी तरह जनसंवाद के मूड में नजर आया। समस्याओं को केवल सुना ही नहीं गया, बल्कि उनके समाधान के लिए ठोस पहल भी की गई। कलेक्टर संजय अग्रवाल का यह जनकेन्द्रित दृष्टिकोण सुशासन का एक प्रभावी उदाहरण बनकर सामने आया है।ग्राम पंचायत छतौना में आयोजित यह ग्राम सभा वास्तव में जनभागीदारी, पारदर्शिता और जवाबदेही का सजीव उदाहरण बनी, जहां पीपल के पेड़ की छांव तले बैठा प्रशासन आमजन के दिलों तक पहुंचता नजर आया। इस आयोजन ने यह स्पष्ट कर दिया कि जब प्रशासन संवेदनशीलता और प्रतिबद्धता के साथ कार्य करता है, तो शासन की योजनाएं केवल कागजों तक सीमित नहीं रहतीं, बल्कि धरातल पर उतरकर लोगों के जीवन में वास्तविक बदलाव लाती हैं।