तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी
बिलासपुर जिले के कलेक्टर संजय अग्रवाल की कार्यशैली को प्रशासनिक स्तर पर लगातार बेहतर और परिणामोन्मुखी माना जा रहा है। विभिन्न योजनाओं के क्रियान्वयन, समीक्षा बैठकों और जनहित से जुड़े निर्णयों में उनकी सक्रियता स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। बावजूद इसके, उनके अधीनस्थ विभागों के अधिकारियों और कर्मचारियों की घोर लापरवाही के चलते आम जनता को समय पर सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है।सूत्रों और जनप्रतिनिधियों से मिल रही शिकायतों के अनुसार, राजस्व विभाग, हाउसिंग बोर्ड, महिला एवं बाल विकास विभाग, पंचायत विभाग और नगरीय निकायों में कई मामलों में काम लंबित पड़े हैं। आम नागरिकों को छोटे-छोटे कार्यों के लिए कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं, जिससे प्रशासन की छवि पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।बताया जा रहा है कि कलेक्टर स्तर पर नियमित समीक्षा और सख्त निर्देश दिए जाने के बावजूद निचले स्तर पर उनकी गंभीरता का अपेक्षित असर नहीं दिख रहा है। कई मामलों में लापरवाह कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई तो होती है, लेकिन वह केवल औपचारिकता तक सीमित रह जाती है। निलंबन जैसी कार्रवाई के बाद कुछ ही समय में पुनः बहाली कर दी जाती है, जिससे न तो अनुशासन स्थापित हो पा रहा है और न ही अन्य कर्मचारियों में जवाबदेही की भावना विकसित हो रही है।प्रशासनिक जानकारों का मानना है कि कलेक्टर संजय अग्रवाल की सकारात्मक और सक्रिय कार्यशैली को जमीनी स्तर पर प्रभावी बनाने के लिए अब सख्त प्रशासनिक कसावट की आवश्यकता है। यदि अधीनस्थ अमले पर ठोस और निरंतर कार्रवाई की जाए, तो निश्चित रूप से जिले में शासन की योजनाओं का लाभ समय पर आम जनता तक पहुंच सकेगा।लोगों का कहना है कि जहां एक ओर कलेक्टर का नेतृत्व मजबूत और प्रतिबद्ध नजर आता है, वहीं दूसरी ओर अधीनस्थ तंत्र की लापरवाही उस पर भारी पड़ती दिख रही है। ऐसे में जरूरत इस बात की है कि अच्छे नेतृत्व के साथ-साथ प्रशासनिक अनुशासन भी उतना ही मजबूत किया जाए, ताकि आम जनता को वास्तविक राहत मिल सके।