तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी

छत्तीसगढ़ के संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल के गृह जिला अंबिकापुर के जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय द्वारा जारी एक महत्वपूर्ण आदेश में एक निजी विद्यालय की गंभीर लापरवाही उजागर होने के बाद उस पर कड़ी कार्रवाई की गई है। मामला सोशल मीडिया और विभिन्न समाचार माध्यमों में सामने आने के बाद प्रशासन ने त्वरित संज्ञान लेते हुए जांच कराई और दोषी पाए जाने पर सख्त कदम उठाए।प्राप्त जानकारी के अनुसार, चोपड़ापारा स्थित स्वरंग किड्स एकेडमी (पेशागी एजुकेशन सोसायटी) द्वारा एक 4 वर्षीय मासूम बच्चे को केवल इस आधार पर प्रवेश देने से मना कर दिया गया कि वह हिंदी भाषा में संवाद नहीं कर पाता और स्थानीय सरगुजिहा बोली में बात करता है। मामला सामने आते ही आमजन में व्यापक आक्रोश देखने को मिला।शिकायत के बाद गठित जांच दल ने पूरे प्रकरण की गंभीरता से जांच की। जांच में यह स्पष्ट हुआ कि विद्यालय प्रबंधन और शिक्षकों ने बच्चे की भाषा को आधार बनाकर प्रवेश से इनकार किया, जो निःशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 का सीधा उल्लंघन है। साथ ही यह नई शिक्षा नीति 2020 की मूल भावना के भी विपरीत पाया गया।जिला शिक्षा अधिकारी ने अपने आदेश में कहा है कि इस प्रकार का व्यवहार न केवल असंवैधानिक है, बल्कि बच्चों के मौलिक अधिकारों का हनन भी है। जांच के दौरान विद्यालय प्रबंधन ने अपनी गलती स्वीकार कर ली।प्रशासन ने कड़ी कार्रवाई करते हुए विद्यालय पर 1 लाख रुपये का अर्थदंड लगाया है तथा आगामी आदेश तक विद्यालय के संचालन पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। साथ ही निर्देशित किया गया है कि निर्धारित राशि शासकीय खजाने में जमा कर उसकी चालान प्रति प्रस्तुत की जाए।इसके अलावा संबंधित विभागों को भी मामले की सूचना देते हुए आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश जारी किए गए हैं। वहीं, विकासखंड शिक्षा अधिकारी को निर्देशित किया गया है कि प्रभावित बच्चे के अभिभावकों से संपर्क कर उसे निकटतम विद्यालय में शीघ्र प्रवेश दिलाया जाए।यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है। प्रशासन की यह कार्रवाई स्पष्ट संदेश देती है कि किसी भी बच्चे को शिक्षा के अधिकार से वंचित करने का प्रयास, चाहे किसी भी आधार पर हो, किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।