अक्षय तृतीया पर बाल विवाह नहीं करने कलेक्टर संजय की अपील,बाल विवाह रोकने जिला प्रशासन सख्त।

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तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी

सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले में अक्षय तृतीया पर बाल विवाह की संभावना को मद्देनजर जिले को बाल विवाह मुक्त बनाने के लिए कलेक्टर डॉ.संजय कन्नौजे के निर्देशानुसार उत्तम प्रसाद जिला कार्यक्रम अधिकारी महिला एवं बाल विकास अधिकारी के मार्गदर्शन में बाल विवाह रोकने के लिए जिला प्रशासन एक्शन मोड में है। सभी विभागों को रणनीति के साथ विस्तृत दिशा-निर्देश दिए है। लगातार निगरानी और सतर्कता के बाद इसमें कमी आई है। बाल विवाह की सूचना पर तत्काल बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारी, जिला बाल संरक्षण इकाई, नजदीकी थाना प्रभारी, चाइल्ड हेल्प लाइन 1098, महिला हेल्प लाइन 181 या आपातकालीन सेवा 112 पर जानकारी देने का अनुरोध किया गया है। कलेक्टर डॉ संजय कन्नौजे ने कहा कि बाल विवाह एक सामाजिक कुप्रथा है, जो बालिकाओं के सर्वांगीण, मानसिक और शिक्षा के विकास को प्रभावित करता है। रविवार को अक्षय तृतीया का पर्व है जिसमें बहुत सारी शादियां होती हैं। प्राय देखने को मिलता है कि बालक एवं बालिकाओं का उम्र कम होने पर भी शादियां की जाती हैं। लड़की का उम्र 18 वर्ष और लड़के का उम्र 21 वर्ष पूर्ण होना विवाह के लिए अनिवार्य है। कलेक्टर ने सभी जिले वासियों से अपील किया है कि बाल विवाह की कोई घटना उनकी जानकारी में आने पर, वह प्रशासन, महिला एवं बाल विकास अधिकारी, पुलिस थाना को सूचना दे ताकि जिले में बाल विवाह की घटना की रोकथाम करें और हम अपने जिले को बाल विवाह मुक्त जिला की ओर अग्रसर करें।*जागरूकता अभियान और समाज प्रमुख से सहयोग की अपील*रविवार 19 अप्रैल को अक्षय तृतीया पर विशेष सतर्कता बरतने एवं बाल विवाह प्रकरणो को रोकने के लिए महिला एवं बाल विकास विभाग ने टीम गठन किया है। गठित टीम जिले भर में सक्रिय रहकर संदिग्ध विवाहों पर नजर रखेंगी तथा आवश्यकता अनुसार त्वरित कार्यवाही करेगी। विभाग के निर्देशों के बाद विभागीय अमला फील्ड में निगरानी कर रहा है। बाल विवाह में कमी लाने के लिए विभाग द्वारा विद्यालय, महाविद्यालय, पंचायत, नगरीय निकाय, धार्मिक स्थल स्तर पर जन जागरूकता अभियान चलाया गया। समाज प्रमुखों को बाल विवाह न होने के लिए दिशा-निर्देश दिए गए। साथ ही समाज में बाल विवाह न हो इसके लिए सभी समाज प्रमुखों को अपने स्तर पर सामाजिक बैठक लेकर बाल विवाह रोकने में अपनी भूमिका निभाने का आग्रह किया गया। महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा इस संबंध में दिशा-निर्देश जारी किए हैं। बाल विवाह मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान के तहत जिले में सभी संबंधित विभागों, पंचायत प्रतिनिधियों और समाज के प्रतिष्ठित व्यक्तियों से सहयोग की अपील की है।


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