मंडल से विधानसभा तक का सफर, फिर भी किनारे क्यों? धरम को लेकर केंद्रीय नेतृत्व पर सवाल।

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तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी

छत्तीसगढ़ भाजपा की राजनीति में एक बड़ा और असहज सवाल लगातार गूंज रहा है कि इतना लंबा और प्रभावशाली राजनीतिक अनुभव होने के बावजूद आखिर क्यों धरम लाल कौशिक को विष्णु देव साय सरकार में कोई जिम्मेदारी नहीं दी गई?बिल्हा के भाजपा विधायक धरम लाल कौशिक का राजनीतिक सफर जमीनी स्तर से शुरू होकर शीर्ष तक पहुंचने की कहानी है। उन्होंने बिलासपुर जिले में मंडल अध्यक्ष के रूप में संगठन की नींव मजबूत की, फिर जिला महामंत्री बनकर संगठनात्मक विस्तार में अहम भूमिका निभाई। इसके बाद वे छत्तीसगढ़ भाजपा संगठन के प्रदेश महामंत्री बने और रणनीतिक स्तर पर पार्टी को मजबूती दी।उनकी नेतृत्व क्षमता को देखते हुए पार्टी ने उन्हें भाजपा संगठन का प्रदेशाध्यक्ष बनाया, जहां उन्होंने प्रदेशभर में संगठन को नई दिशा दी।सिर्फ संगठन ही नहीं, सत्ता में भी उनका कद लगातार बढ़ता रहा। वे बिल्हा विधानसभा क्षेत्र से लगातार विधायक चुने गए और विधानसभा में अध्यक्ष तथा नेता प्रतिपक्ष जैसे संवैधानिक पदों पर रहकर कार्य किया। यह सफर किसी भी नेता के लिए बड़ी उपलब्धि माना जाता है।इसके बावजूद, वर्तमान विष्णु देव साय सरकार में उन्हें कोई स्थान न मिलना अब सीधे तौर पर केंद्रीय नेतृत्व की मंशा पर सवाल खड़े कर रहा है। क्या नरेंद्र मोदी और अमित शाह के नेतृत्व में ऐसा कोई निर्णय लिया गया है, जिसमें कौशिक को सरकार से दूर रखने की रणनीति शामिल है? या फिर यह प्रदेश स्तर की आंतरिक राजनीति का परिणाम है?प्रदेश प्रभारी नीतिन नवीन जो अब भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष है, की भूमिका भी अब चर्चा में है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इतने अनुभवी और संतुलित नेता को नजरअंदाज करना केवल सामान्य निर्णय नहीं हो सकता, इसके पीछे गहरे सियासी समीकरण हो सकते हैं।धरम लाल कौशिक की पहचान एक किसान पुत्र, सरल स्वभाव और सामाजिक-धार्मिक छवि वाले नेता के रूप में रही है। ऐसे में उनके समर्थकों और राजनीतिक जानकारों के बीच यह सवाल और भी तेज हो गया है कि क्या अनुभव और निष्ठा अब राजनीति में पर्याप्त नहीं रह गई है?अब देखना होगा कि भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व इस बढ़ती चर्चा और असंतोष पर क्या रुख अपनाता है, क्या कौशिक को मिलेगा उनकी योग्यता के अनुरूप स्थान, या यह राजनीतिक दूरी आगे भी बनी रहेगी? इस सवाल का जवाब राष्ट्रीय भाजपा संगठन में बदलाव के बीच मिलने की संभावना जताई जा रही है।


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