तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी
“रक्तदान महादान” की भावना को चरितार्थ करते हुए मुंगेली के पुराना बस स्टैंड निवासी विभाष पांडेय ने एक जरूरतमंद मरीज के लिए रक्तदान कर न केवल उसकी मदद की, बल्कि समाज के सामने मानवता की एक प्रेरणादायक मिसाल भी पेश की। हाल ही में एक मरीज रक्त की कमी के कारण दर-दर भटकता रहा, जिसकी स्थिति को देखकर विभाष पांडेय का मन द्रवित हो उठा और उन्होंने तुरंत आगे बढ़कर रक्तदान किया।इस अवसर पर विभाष पांडेय ने लोगों से अपील करते हुए कहा कि रक्तदान से बड़ा कोई दान नहीं होता। यह एक ऐसा कार्य है, जिससे किसी की जान बचाई जा सकती है। उन्होंने बताया कि रक्तदान करने से शरीर में किसी प्रकार की कमजोरी नहीं आती, बल्कि यह स्वास्थ्य के लिए लाभकारी होता है। नियमित रक्तदान से शरीर में नई रक्त कोशिकाओं का निर्माण होता है, जिससे शरीर में ऊर्जा का संचार होता है और व्यक्ति स्वयं को अधिक स्वस्थ एवं सक्रिय महसूस करता है। विभाष पांडेय ने बताया कि वे अब तक चार बार रक्तदान कर चुके हैं और आगे भी जरूरतमंदों की सहायता के लिए सदैव तैयार रहेंगे। उनका मानना है कि समाज के हर सक्षम व्यक्ति को समय-समय पर रक्तदान करना चाहिए, ताकि आपात स्थिति में किसी भी मरीज को रक्त के लिए परेशान न होना पड़े।उन्होंने युवाओं से विशेष रूप से आग्रह करते हुए कहा कि वे इस पुनीत कार्य में बढ़-चढ़कर हिस्सा लें और समाज में जागरूकता फैलाएं। रक्तदान से न केवल किसी का जीवन बचाया जा सकता है, बल्कि यह सामाजिक जिम्मेदारी निभाने का भी एक सशक्त माध्यम है।धर्म सेवा के सक्रिय सदस्य रवि राज ठाकुर ने विभाष पांडेय के इस कार्य की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे प्रयास समाज में सकारात्मक संदेश देते हैं और दूसरों को भी प्रेरित करते हैं। उनका यह कदम निश्चित रूप से जिले में रक्तदान के प्रति जागरूकता बढ़ाने में सहायक सिद्ध होगा। समाजसेवियों का कहना है कि यदि हर व्यक्ति साल में कम से कम एक बार रक्तदान करे, तो किसी भी मरीज को रक्त की कमी का सामना नहीं करना पड़ेगा। ऐसे में विभाष पांडेय जैसे लोगों की पहल न केवल सराहनीय है, बल्कि समाज के लिए एक मार्गदर्शक भी है।