विकास नंद/ सर्वव्यापी
कृषि विभाग महासमुंद में संयुक्त संचालक कृषि गयाराम की अध्यक्षता में रबी वर्ष 2025-26 तथा खरीफ वर्ष 2026 की तैयारियों को लेकर जिला स्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में विभागीय योजनाओं के साथ आगामी खरीफ सीजन की तैयारियों की एजेंडावार समीक्षा करते हुए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।बैठक में सहकारी समितियों के माध्यम से किसानों को वितरित किए जाने वाले बीज एवं उर्वरकों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने हेतु नियमित नमूना जांच के निर्देश दिए गए। साथ ही प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के अंतर्गत लंबित फार्मर आईडी (एग्रीस्टैक) प्रकरणों के त्वरित निराकरण के लिए सुशासन तिहार एवं शिविरों के माध्यम से शत-प्रतिशत लक्ष्य पूर्ण करने पर जोर दिया गया, ताकि किसानों को ऑनलाइन उर्वरक प्राप्त करने में सुविधा मिल सके।खरीफ वर्ष 2026 को ध्यान में रखते हुए रासायनिक उर्वरकों के विकल्प के रूप में हरी खाद, मूंग, ढेंचा, सनई, नील हरित काई एवं नैनो उर्वरकों के उपयोग को बढ़ावा देने पर विशेष चर्चा की गई। शासकीय कृषि प्रक्षेत्र बरंतुगा में 22 टैंकों में नील हरित काई उत्पादन प्रारंभ किए जाने की जानकारी दी गई, वहीं विकासखंड बसना में प्रगतिशील कृषक अर्तयामी प्रधान द्वारा स्वयं के दो टैंकों में उत्पादन किए जाने का उदाहरण भी साझा किया गया।संयुक्त संचालक ने अधिकारियों को क्षेत्र स्तर पर सतत मॉनिटरिंग करते हुए किसानों के बीच इन वैकल्पिक उर्वरकों के उपयोग को बढ़ाने के निर्देश दिए। बीज उत्पादन कार्यक्रम के अंतर्गत 10 वर्ष के भीतर विकसित उन्नत किस्मों के चयन एवं अधिकाधिक उत्पादन के लिए प्रशिक्षण और प्रचार-प्रसार पर भी बल दिया गया।बैठक में जिले में रासायनिक उर्वरकों की उपलब्धता, भंडारण, वितरण एवं शेष स्टॉक की समीक्षा की गई। अधिकारियों ने बताया कि वर्तमान में जिले में पर्याप्त उर्वरक उपलब्ध है। किसानों को अग्रिम उठाव तथा डीएपी के वैकल्पिक उपयोग के प्रति जागरूक करने के निर्देश दिए गए।इसके अतिरिक्त, जिले के प्रगतिशील कृषकों द्वारा उत्पादित सुगंधित एवं फोर्टिफाइड चावल की पैकेजिंग, ब्रांडिंग और निर्यात को बढ़ावा देने पर भी विस्तार से चर्चा की गई।बैठक में उप संचालक कृषि, अनुविभागीय कृषि अधिकारी महासमुंद एवं सरायपाली, सहायक मृदा परीक्षण अधिकारी, वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी सहित विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।