विकास नंद/ सर्वव्यापी/
जिले के सरायपाली विकासखंड सहित कई क्षेत्रों में इन दिनों शासकीय मदिरा दुकानों पर शराब की कमी से हालात बिगड़ते नजर आ रहे हैं। दुकानों में निर्धारित ब्रांड उपलब्ध नहीं होने के कारण कालाबाजारी का धंधा तेजी से फल-फूल रहा है। स्थिति यह है कि शराब प्रेमियों को अपनी पसंद की शराब पाने के लिए तय कीमत से दोगुनी-तिगुनी राशि चुकानी पड़ रही है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्रशासन की सुस्ती और निगरानी की कमी के चलते यह पूरा खेल खुलेआम चल रहा है। शासकीय दुकानों में स्टॉक खत्म होने का हवाला दिया जा रहा है, जबकि दूसरी ओर वही शराब अवैध रूप से कोचियों के पास आसानी से उपलब्ध हो रही है। इससे यह सवाल खड़ा हो रहा है कि आखिर वैध दुकानों से इतनी बड़ी मात्रा में शराब बाहर कैसे पहुंच रही है।
सूत्रों के अनुसार, शराब की इस कमी का फायदा उठाकर कोचिया वर्ग मालामाल हो रहा है। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में बेझिझक तरीके से ब्लैक में शराब बेची जा रही है, जिससे न केवल आम उपभोक्ता आर्थिक रूप से शोषित हो रहे हैं, बल्कि शासन की व्यवस्था पर भी सवाल उठने लगे हैं।
उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ में पूर्ववर्ती सरकार के समय भी अवैध महुआ शराब के खिलाफ लगातार कार्रवाई होती रही है और वर्तमान सरकार में भी यह अभियान जारी है। इसके बावजूद वैध शराब की कालाबाजारी पर अंकुश नहीं लग पा रहा है, जो जांच का विषय बन गया है।वहीं यदि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की जाए, तो कई जिम्मेदार चेहरे बेनकाब हो सकते हैं। संबंधित विभाग को इस दिशा में सख्ती दिखाने की आवश्यकता है, ताकि आम जनता को राहत मिल सके और अवैध कारोबार पर लगाम लगाई जा सके।