विकास नंद /सर्वव्यापी/
वित्तीय वर्ष 1 अप्रैल 2026 से क्षेत्र की शासकीय मदिरा दुकानों में शराब की अचानक कमी ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। मदिरा प्रेमियों को दुकानों में शराब नहीं मिल रही, जिसके चलते उन्हें मजबूरन ब्लैक मार्केट का सहारा लेना पड़ रहा है।सूत्रों के अनुसार, शासकीय दुकानों से ही कोचियों को अतिरिक्त पैसे लेकर मनमानी मात्रा में शराब उपलब्ध कराई जा रही है। यही शराब बाद में आम लोगों को दोगुने-तीगुने दाम पर बेची जा रही है। इससे साफ संकेत मिल रहे हैं कि कहीं न कहीं सिस्टम में बड़ी गड़बड़ी है।वर्तमान में शादी-ब्याह का सीजन चरम पर है, ऐसे समय में शराब की मांग भी बढ़ी हुई है। इस मौके का फायदा उठाकर अवैध कारोबारी जमकर मुनाफा कमा रहे हैं। आम जनता मजबूरी में महंगी शराब खरीदने को विवश है, जबकि सरकारी दुकानों पर “स्टॉक खत्म” होने की बातें कही जाती है।हालांकि संबंधित विभाग द्वारा लगातार कार्रवाई जारी है, लेकिन बड़ा सवाल यह है कि जब इतनी बड़ी मात्रा में शराब पकड़ी जा रही है, तो वह आखिर कहां से आ रही है? शासकीय दुकानों से ही आपूर्ति होने की चर्चा आमजन के बीच जोरों पर है।इस पूरे मामले में प्रशासन की सुस्ती या मौन स्वीकृति पर भी सवाल उठ रहे हैं। लोगों का कहना है कि यदि सख्ती से निगरानी हो, तो इस तरह की कालाबाजारी पर तुरंत रोक लग सकती है।गौरतलब है कि पिछली सरकार के दौरान भी कथित शराब घोटाले की चर्चाएं रही हैं। ऐसे में वर्तमान हालात को देखते हुए लोग एक बार फिर संभावित गड़बड़ी और बड़े घोटाले की आशंका जता रहे हैं।यह स्थिति न केवल शासन-प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़ी करती है, बल्कि आम जनता के विश्वास को भी कमजोर कर रही है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस गंभीर मुद्दे पर ठोस कार्रवाई कर हालात को नियंत्रित करता है या नहीं।