तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी
छत्तीसगढ़ के राजस्व विभाग में एक बार फिर बड़े प्रशासनिक फेरबदल की सुगबुगाहट तेज हो गई है। अनुविभागीय अधिकारी राजस्व (एसडीएम), तहसीलदार, अतिरिक्त तहसीलदार और नायब तहसीलदार स्तर के अधिकारियों की व्यापक स्थानांतरण सूची तैयार होने की चर्चा मंत्रालय से लेकर जिला मुख्यालयों तक जोरों पर है। माना जा रहा है कि राजस्व सचिव के रूप में शम्मी आबिदी के पदभार ग्रहण करने के बाद विभागीय कार्यप्रणाली में तेजी आई है और लंबे समय से लंबित प्रशासनिक पुनर्संरचना अब अमल की ओर बढ़ रही है।सूत्रों के अनुसार सरकार आगामी महीनों में जमीन विवाद, राजस्व प्रकरणों की लंबित फाइलें, अवैध प्लाटिंग, नामांतरण, सीमांकन और भू-अधिग्रहण से जुड़े मामलों में तेजी लाने के उद्देश्य से राजस्व अमले में व्यापक बदलाव करने जा रही है। कई जिलों में वर्षों से जमे अधिकारियों को हटाने तथा फील्ड में सक्रिय और कार्यशैली के आधार पर अधिकारियों की नई पदस्थापना करने की तैयारी बताई जा रही है। यही कारण है कि मंत्रालय और जिला कार्यालयों में तबादला सूची को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है।बताया जा रहा है कि जिन जिलों में राजस्व प्रकरणों की शिकायतें लगातार बढ़ी हैं, वहां विशेष निगरानी रखी जा रही है। कई अधिकारियों के कार्यकाल, शिकायतों और प्रशासनिक प्रदर्शन की समीक्षा के बाद सूची तैयार की गई है। सरकार की प्राथमिकता ऐसे अधिकारियों को संवेदनशील क्षेत्रों से हटाने की मानी जा रही है जिन पर पक्षपात, भूमाफियाओं से सांठगांठ या कामकाज में लापरवाही के आरोप लगते रहे हैं।राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में यह भी चर्चा है कि हाल ही में विभिन्न विभागों में हुए आईएएस और आईपीएस स्तर के फेरबदल के बाद अब राजस्व विभाग को “मैदानी सर्जरी” के रूप में देखा जा रहा है। क्योंकि सीधे जनता से जुड़े मामलों में सबसे अधिक शिकायतें राजस्व अमले को लेकर ही सामने आती हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में सीमांकन, बंटवारा, नक्शा सुधार, फौती नामांतरण और अवैध कब्जों के मामलों में देरी से आम लोगों में नाराजगी बढ़ती रही है।सूत्र यह भी संकेत दे रहे हैं कि कई ऐसे अधिकारियों को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिल सकती है जिनकी छवि फील्ड में सख्त और निष्पक्ष अधिकारी के रूप में रही है। वहीं कुछ जिलों में राजनीतिक समीकरणों और स्थानीय दबावों को ध्यान में रखते हुए भी बदलाव किए जाने की संभावना जताई जा रही है। इससे यह तबादला सूची केवल प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं बल्कि सरकार की कार्यशैली और नियंत्रण क्षमता की परीक्षा भी मानी जा रही है।राजस्व विभाग में संभावित इस बड़े फेरबदल को लेकर अधिकारी वर्ग में बेचैनी साफ दिखाई देने लगी है। मंत्रालय के गलियारों में कौन जाएगा और कौन हटेगा, इसे लेकर चर्चाएं लगातार जारी हैं। कई अधिकारी राजधानी में सक्रिय होकर अपनी पसंदीदा पदस्थापना बचाने या नई जगह पाने के प्रयासों में जुटे बताए जा रहे हैं।अब सभी की नजर राज्य सरकार और राजस्व विभाग की आधिकारिक सूची पर टिकी हुई है। यदि यह व्यापक तबादला सूची जारी होती है तो आने वाले दिनों में जिले से लेकर तहसील स्तर तक प्रशासनिक समीकरण पूरी तरह बदलते दिखाई दे सकते हैं।