तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी
छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के “सुशासन तिहार” अभियान के समापन के बाद अब राज्य के प्रशासनिक गलियारों में एक बार फिर बड़े फेरबदल की चर्चाएं तेज हो गई हैं। हाल ही में राज्य शासन ने 42 आईएएस अधिकारियों के प्रभार बदलते हुए कई जिलों के कलेक्टरों की जिम्मेदारियों में बदलाव किया था। इसके बाद अब आईएएस और आईपीएस अधिकारियों की नई तबादला सूची को लेकर राजधानी से लेकर जिलों तक अटकलों का दौर शुरू हो गया है।सूत्रों की मानें तो सरकार अब केवल कागजी समीक्षा तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि “मैदानी प्रदर्शन” के आधार पर अफसरों की कार्यशैली का मूल्यांकन किया जा रहा है। सुशासन तिहार के दौरान मुख्यमंत्री और मंत्रियों के सीधे फील्ड दौरे, आकस्मिक निरीक्षण, जनता से संवाद और शिकायतों की मॉनिटरिंग ने कई जिलों की प्रशासनिक वास्तविकता सामने ला दी। ऐसे में जिन जिलों में योजनाओं की गति धीमी मिली, जनता की शिकायतें अधिक रहीं या प्रशासनिक समन्वय कमजोर नजर आया, वहां बड़े बदलाव तय माने जा रहे हैं।बताया जा रहा है कि सरकार अब ऐसे अफसरों को प्राथमिकता देना चाहती है जो केवल दफ्तरों तक सीमित न रहकर गांवों और जमीनी स्तर पर सक्रिय दिखें। यही कारण है कि हाल के फेरबदल को सिर्फ “सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया” नहीं बल्कि आगामी रणनीतिक प्रशासनिक पुनर्गठन के रूप में देखा जा रहा है। कई जिलों में कलेक्टर बदलने के बाद अब पुलिस प्रशासन में भी बदलाव की संभावना जताई जा रही है, क्योंकि कानून व्यवस्था, अवैध कारोबार, नशे, खनिज तस्करी और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों पर सरकार लगातार सख्त रुख दिखा रही है।राजनीतिक और प्रशासनिक विश्लेषकों का मानना है कि यह फेरबदल केवल पदस्थापना तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सरकार आगामी नगरीय निकाय और पंचायत चुनावों के पहले प्रशासनिक मशीनरी को पूरी तरह चुस्त-दुरुस्त करना चाहती है। यही वजह है कि ऐसे अफसरों की तलाश हो रही है जिनकी छवि सख्त, जवाबदेह और परिणाम देने वाली हो।सूत्र यह भी बताते हैं कि कुछ ऐसे जिलों की रिपोर्ट शासन तक पहुंची है जहां जनसमस्याओं के समाधान में लापरवाही, राजस्व मामलों में धीमापन, निर्माण कार्यों की खराब गुणवत्ता और स्थानीय जनप्रतिनिधियों से तालमेल की कमी की शिकायतें लगातार मिल रही थीं। सुशासन तिहार के दौरान मिली फीडबैक रिपोर्ट अब कई अफसरों के भविष्य का आधार बन सकती है।इधर मंत्रालय में यह चर्चा भी तेज है कि सरकार “परफॉर्मेंस बेस्ड पोस्टिंग” मॉडल पर आगे बढ़ना चाहती है। यानी जिन अफसरों ने सरकार की योजनाओं को जमीन पर बेहतर तरीके से लागू किया, जनता के बीच सक्रिय रहे और विवादों से दूर रहकर काम किया, उन्हें महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां मिल सकती हैं। वहीं लंबे समय से एक ही जगह जमे अधिकारियों पर भी शासन की नजर बताई जा रही है।हालांकि आधिकारिक तौर पर नई सूची को लेकर कोई पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन प्रशासनिक हलकों में यह लगभग तय माना जा रहा है कि सुशासन तिहार के बाद शासन अब “एक्शन मोड” में दिखाई देगा। आने वाले दिनों में आईएएस और आईपीएस अधिकारियों की नई सूची कई जिलों की प्रशासनिक तस्वीर बदल सकती है।