रेंजर के पत्र से मचा हड़कंप : “मंत्रीजी को देना है पैसा”।

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रायपुर, मजहर इकबाल, ब्यूरो चीफ सर्वव्यापी

नंदनवन पक्षी विहार में पदस्थ संयुक्त वनमंडलाधिकारी (एसडीओ) के खिलाफ गंभीर शिकायतें सामने आने के बाद वन विभाग में हड़कंप मच गया है। नंदनवन के रेंजर हिमांचल साहू ने विभागीय अधिकारियों को लिखित शिकायत देकर आरोप लगाया है कि उन पर फर्जी बिल तैयार कर भुगतान कराने का दबाव बनाया जा रहा था। शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि कथित तौर पर कहा जाता था कि “यह राशि मंत्रीजी को देना जरूरी है।”पूरा मामला सामने आने के बाद विभागीय कार्यप्रणाली और प्रशासनिक व्यवहार पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। रेंजर द्वारा की गई शिकायत में कुल 12 बिंदुओं का उल्लेख किया गया है, जिनमें मानसिक प्रताड़ना, फाइलों को रोकना, कर्मचारियों के वेतन भुगतान में देरी और नियमविरुद्ध कार्य कराने जैसे आरोप शामिल हैं।“मंत्रीजी को देना है पैसा”, फर्जी बिल बनाने का दबावरेंजर हिमांचल साहू की शिकायत का सबसे सनसनीखेज हिस्सा वह है, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया है कि एसडीओ द्वारा उन पर फर्जी बिल तैयार करने का दबाव बनाया जाता था। शिकायत के अनुसार, कई ऐसे बिल तैयार करने के लिए कहा गया जो नियमों के अनुरूप नहीं थे।रेंजर ने अपनी शिकायत में लिखा है कि जब उन्होंने नियमों का हवाला देकर ऐसे बिल तैयार करने से मना किया, तो उन्हें कहा गया कि “यह राशि मंत्रीजी को देना जरूरी है।” इस आरोप ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है। हालांकि बातचीत में हिमांचल साहू ने शिकायत की पुष्टि जरूर की, लेकिन आरोपों पर विस्तार से बोलने से इनकार कर दिया।DFO बोले – जांच टीम गठित करेंगेइस पूरे मामले में जब DFO मयंक पांडेय से बात की, तो उन्होंने रेंजर की शिकायत मिलने से इनकार किया, लेकिन दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों की शिकायत मिलने की बात स्वीकार की। डीएफओ ने कहा कि शिकायत के आधार पर जांच टीम बनाई जा रही है और रिपोर्ट के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।उन्होंने कहा कि यदि रेंजर की ओर से भी औपचारिक शिकायत आती है, तो उस पर भी नियमानुसार जांच की जाएगी।“ मुझे आज ही शिकायती पत्र मिला है, शिकायत के आधार पर एक जांच टीम बना रहे हैं, रिपोर्ट के अनुसार कार्रवाई करेंगे। जहां तक रेंजर की शिकायत की बात आप पूछ रहे हैं, तो उनकी शिकायत आने दीजिये, फिर उस पर बोल पाना सही रहेगा”फाइल रोकने और काम प्रभावित करने के आरोपरेंजर की शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि कार्यालयीन पत्र और फाइलें समय पर अग्रेषित नहीं की जातीं, जिससे विभागीय कार्य प्रभावित हो रहे हैं। कई बार उन्हें घंटों कार्यालय में इंतजार करना पड़ता है, जिससे फील्ड मॉनिटरिंग और निरीक्षण प्रभावित हो रहे हैं।शिकायत के अनुसार, विभिन्न प्राक्कलन, वाउचर और प्रतिवेदन समय पर आगे नहीं भेजे जाने के कारण परियोजनाओं और शासकीय कार्यों में अनावश्यक देरी हो रही है।“इतनी ईमानदारी है तो टीचिंग कर लो”रेंजर ने अपनी शिकायत में यह भी उल्लेख किया है कि जब उन्होंने नियमों के अनुरूप कार्य करने की बात कही, तो उन्हें अपमानजनक टिप्पणियों का सामना करना पड़ा।शिकायत में कहा गया है कि एसडीओ ने कथित तौर पर उनसे कहा – “अगर इतनी ईमानदारी से काम करना है तो टीचिंग की नौकरी कर लो, यह काम आपके लिए नहीं है।” रेंजर ने इसे मानसिक प्रताड़ना और विभागीय माहौल खराब करने वाला व्यवहार बताया है।कर्मचारियों ने भी खोला मोर्चाइधर, नंदनवन के दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों ने भी एसडीओ के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। कर्मचारियों ने डीएफओ और कलेक्टर को अलग-अलग शिकायतें देकर दुर्व्यवहार, वेतन रोकने और मानसिक प्रताड़ना के आरोप लगाए हैं।कर्मचारियों का कहना है कि उन्हें लगातार नौकरी से निकालने और स्थानांतरण की धमकी दी जाती है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि कर्मचारियों को सार्वजनिक रूप से “निकम्मे”, “महामूर्ख” और “काम के लायक नहीं” जैसे शब्द कहे जाते हैं।निजी बंगले में काम करने कर्मचारियों को बुलाने का आरोपदैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों ने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें पीने का पानी, शौचालय और बाथरूम जैसी मूलभूत सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं कराई जातीं। कर्मचारियों के अनुसार, उन्हें निजी कार्यों के लिए अवंती विहार स्थित आवास बुलाया जाता है और आने-जाने का पेट्रोल खर्च भी अपनी जेब से वहन करना पड़ता है। पेट्रोल मांगने पर कथित तौर पर कहा जाता है – “काम करना है तो खुद व्यवस्था करो, नहीं तो काम बंद कर दो।”अपशब्दों के इस्तेमाल से कर्मचारियों में आक्रोशकलेक्टर को दी गई शिकायत में कर्मचारियों ने आरोप लगाया है कि उनके साथ बेहद आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया गया। शिकायत में कहा गया है कि कुछ कर्मचारियों को “पागल” और “सा$$, चू&&” जैसे शब्द कहे गए, जिससे कर्मचारियों में भारी आक्रोश है।कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो वे नंदनवन के गेट पर धरना प्रदर्शन करने को मजबूर होंगे। उनका कहना है कि मौजूदा माहौल में सामान्य और निष्पक्ष तरीके से काम करना मुश्किल हो गया है।जांच पर टिकी सबकी नजरपूरा मामला सामने आने के बाद वन विभाग में हलचल तेज हो गई है। अब सभी की नजर विभागीय जांच पर टिकी है। यदि आरोपों की पुष्टि होती है तो मामला केवल प्रशासनिक दुर्व्यवहार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वित्तीय अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों तक पहुंच सकता है।


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