तरुण, कौशिक संपादक सर्वव्यापी
रायपुर स्थित मंत्रालय महानदी भवन और विभिन्न संचालनालयों में अधिकारी-कर्मचारी निर्धारित समय सुबह 10 बजे तक अपने कार्यालयों में पहुंचकर कार्य शुरू कर देते हैं, लेकिन दूसरी ओर प्रदेश के कई जिलों में सरकारी दफ्तरों की कार्यप्रणाली को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। आम लोगों की शिकायत है कि अनेक विभागों में अधिकारी और कर्मचारी दोपहर 12 बजे तक भी कार्यालय नहीं पहुंचते, जिससे आम जनता के काम प्रभावित हो रहे हैं।प्रदेश सरकार सुशासन, पारदर्शिता और समयबद्ध सेवा वितरण की बात करती है। मंत्रालय स्तर पर इसका असर भी दिखाई देता है, जहां नियमित मॉनिटरिंग और वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी के कारण समय पालन अपेक्षाकृत बेहतर है। लेकिन जिलों और मैदानी स्तर के कार्यालयों में स्थिति कई जगह इसके विपरीत नजर आती है। वहां समय पर उपस्थिति सुनिश्चित कराने की व्यवस्था कमजोर दिखाई देती है।ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों से आने वाले लोग सुबह से ही विभिन्न कार्यालयों के बाहर अपने कार्यों के लिए इंतजार करते रहते हैं। राजस्व, पंचायत, शिक्षा, वन, कृषि और अन्य विभागों में कई बार संबंधित अधिकारी उपलब्ध नहीं होने के कारण लोगों को घंटों इंतजार करना पड़ता है। इससे न केवल जनता का समय और पैसा बर्बाद होता है, बल्कि शासन-प्रशासन की छवि पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।प्रशासनिक जानकारों का मानना है कि यदि मंत्रालय और संचालनालय में समयबद्ध कार्यसंस्कृति लागू हो सकती है तो वही व्यवस्था जिलों में भी प्रभावी ढंग से लागू की जानी चाहिए। बायोमेट्रिक उपस्थिति, आकस्मिक निरीक्षण और जवाबदेही तय करने जैसी व्यवस्थाओं को सख्ती से लागू कर स्थिति में सुधार लाया जा सकता है।प्रदेश में सुशासन की अवधारणा तभी पूरी तरह सफल मानी जाएगी, जब मंत्रालय से लेकर जिले और तहसील स्तर तक सभी सरकारी कार्यालयों में एक समान कार्यसंस्कृति दिखाई दे। सवाल यह है कि जब राजधानी में अधिकारी-कर्मचारी समय पर पहुंच सकते हैं, तो जिलों में इस व्यवस्था को लागू करने में आखिर बाधा क्या है? जनता अब इस सवाल का जवाब और व्यवस्था में सुधार दोनों चाहती है।