शराब से राजस्व, लेकिन दुकानों में शराब गायब! व्यवस्था पर उठ रहे सवाल, उपभोक्ताओं में बढ़ता असंतोष।

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तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी

छत्तीसगढ़ सरकार की आय का एक बड़ा स्रोत शराब बिक्री को माना जाता है। हर वर्ष आबकारी विभाग के माध्यम से सरकार को हजारों करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त होता है और यही कारण है कि शराब नीति तथा उसकी उपलब्धता हमेशा चर्चा का विषय बनी रहती है। लेकिन विडंबना यह है कि जिस व्यवस्था से सरकार को भारी राजस्व मिल रहा है, उसी व्यवस्था में इन दिनों कई क्षेत्रों से शराब दुकानों में निर्धारित ब्रांडों की अनुपलब्धता और पर्याप्त स्टॉक नहीं होने की शिकायतें सामने आ रही हैं।शराब उपभोक्ताओं का आरोप है कि वे सरकारी दुकानों में अपनी पसंद के ब्रांड खरीदने पहुंचते हैं, लेकिन उन्हें अक्सर “स्टॉक खत्म है” या “माल नहीं आया है” जैसे जवाब सुनने को मिलते हैं। कई जगहों पर उपभोक्ताओं को एक दुकान से दूसरी दुकान तक भटकना पड़ रहा है। इससे न केवल लोगों में नाराजगी बढ़ रही है, बल्कि सरकारी आपूर्ति व्यवस्था और आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।जानकारों का मानना है कि यदि सरकार स्वयं शराब बिक्री का संचालन कर रही है तो फिर उत्पादों की नियमित उपलब्धता सुनिश्चित करना भी उसकी जिम्मेदारी है। उपभोक्ताओं का तर्क है कि जब सरकार राजस्व वसूली में कोई कमी नहीं छोड़ती, तब दुकानों में पर्याप्त स्टॉक बनाए रखने की व्यवस्था भी उतनी ही मजबूत होनी चाहिए। यदि मांग और आपूर्ति के बीच संतुलन नहीं बन पा रहा है तो इसके कारणों की समीक्षा आवश्यक है।राजनीतिक और सामाजिक हलकों में भी यह चर्चा का विषय बनता जा रहा है। विपक्षी दलों को सरकार की आबकारी नीति पर सवाल उठाने का अवसर मिल रहा है, वहीं आम उपभोक्ता इसे प्रशासनिक लापरवाही और समन्वय की कमी का परिणाम बता रहे हैं। कई लोगों का कहना है कि सरकारी दुकानों में शराब उपलब्ध नहीं होने से अवैध बिक्री और कालाबाजारी को भी बढ़ावा मिलने की आशंका रहती है, जिस पर प्रभावी निगरानी की आवश्यकता है।विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार को इस पूरे मामले की गंभीरता से समीक्षा करनी चाहिए। यदि आपूर्ति श्रृंखला में कहीं बाधा है तो उसे तत्काल दूर किया जाए और यदि वितरण व्यवस्था में खामियां हैं तो जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए। आखिरकार जिस व्यवस्था से सरकार को बड़ा राजस्व प्राप्त होता है, उसकी विश्वसनीयता और सुचारू संचालन बनाए रखना भी उतना ही आवश्यक है।फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब सरकार शराब बिक्री से होने वाली आय पर निर्भर है, तो फिर सरकारी दुकानों में शराब की कमी क्यों दिखाई दे रही है? यह प्रश्न केवल शराब उपभोक्ताओं का नहीं, बल्कि सरकारी प्रबंधन और आबकारी व्यवस्था की कार्यकुशलता पर भी सीधा सवाल खड़ा करता है। आने वाले दिनों में सरकार इस असंतोष को किस प्रकार संबोधित करती है, इस पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।


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