तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी
किसी भी सरकार की छवि केवल उसकी नीतियों और योजनाओं से नहीं बनती, बल्कि उन अधिकारियों और कर्मचारियों के व्यवहार से भी बनती है जो प्रतिदिन आम जनता से सीधे संवाद करते हैं। छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री सचिवालय में पदस्थ वरिष्ठ आईएएस अधिकारी पी. दयानंद की कार्यशैली इन दिनों इसी कारण चर्चा का विषय बनी हुई है। प्रशासनिक जिम्मेदारियों के अत्यधिक दबाव के बावजूद उनका सहज, सरल और विनम्र व्यक्तित्व लोगों के बीच सकारात्मक संदेश देने का काम कर रहा है।मुख्यमंत्री सचिवालय जैसे महत्वपूर्ण और व्यस्त कार्यालय में जहां प्रतिदिन विभिन्न जिलों से बड़ी संख्या में लोग अपनी समस्याएं और अपेक्षाएं लेकर पहुंचते हैं, वहां पी. दयानंद का आम नागरिकों के प्रति व्यवहार उन्हें अन्य अधिकारियों से अलग पहचान दिलाता है। उनसे मिलने आने वाले लोगों का कहना है कि वे बिना किसी औपचारिक दूरी के लोगों की बातें सुनते हैं और यथासंभव समाधान की दिशा में मार्गदर्शन भी प्रदान करते हैं।प्रशासनिक विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी अधिकारी का व्यक्तित्व उसके अधीनस्थ कर्मचारियों की कार्यशैली में भी दिखाई देता है। मुख्यमंत्री सचिवालय में पी. दयानंद के निजी स्थापना में पदस्थ विकास शर्मा, राजपूत, लक्ष्मी प्रसाद, पटेल, मोहित, भूपेश सहित अन्य कर्मचारी भी इसी सकारात्मक कार्य संस्कृति का परिचय देते दिखाई देते हैं। आगंतुकों के अनुसार ये कर्मचारी लोगों की बातों को धैर्यपूर्वक सुनते हैं, आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराते हैं तथा कार्यालयीन प्रक्रियाओं को समझाने में सहयोगात्मक भूमिका निभाते हैं।विशेष बात यह है कि सचिवालय में आने वाले अनेक लोग केवल अपनी समस्या के समाधान की उम्मीद लेकर नहीं आते, बल्कि वे सम्मानजनक व्यवहार की भी अपेक्षा रखते हैं। ऐसे में जब किसी कार्यालय में अधिकारी और कर्मचारी दोनों ही संवेदनशीलता और सौहार्दपूर्ण व्यवहार का परिचय देते हैं, तो लोगों के मन में शासन-प्रशासन के प्रति विश्वास और मजबूत होता है।प्रशासनिक हलकों में यह चर्चा भी है कि मुख्यमंत्री सचिवालय में विकसित यह कार्य संस्कृति सुशासन की उस अवधारणा को मजबूत करती है जिसमें जनता को केवल सेवा प्राप्तकर्ता नहीं, बल्कि शासन व्यवस्था का महत्वपूर्ण भागीदार माना जाता है। पी. दयानंद और उनकी टीम की कार्यशैली इसी सोच को व्यवहारिक रूप देने का प्रयास करती दिखाई देती है।कुल मिलाकर, मुख्यमंत्री सचिवालय में वरिष्ठ आईएएस अधिकारी पी. दयानंद एवं उनके निजी स्टाफ द्वारा प्रदर्शित विनम्रता, सहयोगात्मक दृष्टिकोण और जनसरोकारों के प्रति संवेदनशील व्यवहार एक सकारात्मक प्रशासनिक वातावरण का निर्माण कर रहा है। यही कारण है कि उनसे मिलने आने वाले अधिकांश लोग संतुष्टि और विश्वास के साथ लौटते हैं, जो किसी भी जनोन्मुखी प्रशासन की सबसे बड़ी उपलब्धि मानी जाती है।