तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी
छत्तीसगढ़ देश के उन राज्यों में गिना जाता है जहां बिजली उत्पादन की क्षमता प्रचुर मात्रा में है, लेकिन विडंबना यह है कि प्रदेश की जनता आज भी लगातार बिजली कटौती और आंख-मिचौली की समस्या से जूझ रही है। बिलासपुर संभाग मुख्यालय के तिफरा क्षेत्र में, जहां बिजली विभाग का बड़ा कार्यालय स्थित है, वहीं आसपास के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के नागरिक हर आधे घंटे में बिजली गुल होने की समस्या से परेशान हैं।तिफरा नगर से लेकर लगभग 10 से 12 किलोमीटर दूर बसे गांवों और कॉलोनियों में दिन और रात दोनों समय बिजली का बार-बार आना-जाना आम बात बन गई है। गर्मी के इस मौसम में बार-बार बिजली बंद होने से लोगों को पेयजल, घरेलू कार्यों, व्यापारिक गतिविधियों और विद्यार्थियों की पढ़ाई तक में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब बिजली विभाग का प्रमुख कार्यालय इसी क्षेत्र में मौजूद है, तब भी स्थानीय उपभोक्ताओं को निर्बाध बिजली क्यों नहीं मिल पा रही है? आम नागरिकों का कहना है कि शिकायतों के बावजूद स्थायी समाधान नहीं निकल पा रहा है। विभाग अक्सर मेंटेनेंस, ओवरलोड और तकनीकी फॉल्ट का हवाला देता है, जबकि प्रदेश के अन्य हिस्सों में भी इसी प्रकार की समस्याएं लंबे समय से सामने आती रही हैं। छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत वितरण कंपनी द्वारा समय-समय पर विभिन्न क्षेत्रों में रखरखाव कार्यों के कारण निर्धारित बिजली बंदी की सूचनाएं जारी की जाती हैं, लेकिन उपभोक्ताओं का आरोप है कि कई बार अघोषित कटौती भी होती है, जिससे जनजीवन प्रभावित होता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि बिजली उत्पादन करने वाला प्रदेश ही अपने नागरिकों को निर्बाध बिजली उपलब्ध नहीं करा पा रहा है, तो यह व्यवस्था की गंभीर खामी को दर्शाता है। तिफरा, सिरगिट्टी, सकरी तथा आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ती नाराजगी अब जनप्रतिनिधियों और प्रशासन के लिए भी चिंता का विषय बनती जा रही है।जनता की मांग है कि बिजली विभाग क्षेत्र की वितरण व्यवस्था की व्यापक समीक्षा करे, जर्जर लाइनों और ट्रांसफार्मरों का उन्नयन करे तथा अघोषित बिजली कटौती पर तत्काल रोक लगाए, ताकि प्रदेश की ऊर्जा राजधानी कहलाने वाले बिलासपुर में लोगों को कम से कम बुनियादी सुविधा के लिए परेशान न होना पड़े।