भ्रामक खबरों पर प्रशासन ने रखा अपना पक्ष: खाद कालाबाजारी मामले में कार्रवाई पूरी तरह तथ्यात्मक..जांच में लापरवाही और रिपोर्ट नहीं देने पर दो वरिष्ठ कृषि विस्तार अधिकारी निलंबित, 26 उर्वरक विक्रय केंद्रों पर भी गिरी गाज।

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विकास नंद/सर्वव्यापी

जिले में खाद की जमाखोरी, कालाबाजारी और अनियमित वितरण के खिलाफ चल रही प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर कुछ वेब पोर्टलों में प्रकाशित भ्रामक खबरों पर जिला प्रशासन ने स्पष्टता दी है। प्रशासन ने कहा है कि दो वरिष्ठ कृषि विस्तार अधिकारियों का निलंबन पूरी जांच, विभागीय दस्तावेजों और नियमानुसार प्रक्रिया के आधार पर किया गया है।जिले में किसानों को समय पर और निर्धारित दर पर उर्वरक उपलब्ध कराने के लिए जिला प्रशासन और कृषि विभाग लगातार निगरानी एवं सत्यापन अभियान चला रहा है। इसी क्रम में विकासखंड बागबाहरा और सरायपाली के दो वरिष्ठ कृषि विस्तार अधिकारियों को विभागीय निर्देशों की अनदेखी और जांच में लापरवाही बरतने के कारण निलंबित किया गया है।

उप संचालक कृषि एफ.आर. कश्यप ने बताया कि वैश्विक स्तर पर उर्वरकों की आपूर्ति प्रभावित होने के कारण इस वर्ष खाद वितरण व्यवस्था पर विशेष निगरानी रखी जा रही है। किसानों को किसी प्रकार की परेशानी न हो, इसके लिए प्रशासन लगातार उर्वरक विक्रय केंद्रों का निरीक्षण कर रहा है।उन्होंने बताया कि कलेक्टर के निर्देशानुसार आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 एवं उर्वरक (नियंत्रण) आदेश 1985 के तहत कार्रवाई की जा रही है। प्रशासन का उद्देश्य किसानों को शासन द्वारा निर्धारित दर पर समय पर खाद उपलब्ध कराना तथा कालाबाजारी पर प्रभावी रोक लगाना है।26 उर्वरक विक्रय केंद्रों के लाइसेंस निलंबितजांच में यह सामने आया कि 16 मार्च से 29 मार्च 2026 के बीच, जबकि यह अवधि फसल उत्पादन की दृष्टि से अक्रियाशील मानी जाती है, जिले के कई उर्वरक विक्रेताओं द्वारा असामान्य एवं अनियमित मात्रा में खाद का वितरण किया गया।मामले को गंभीर मानते हुए प्रशासन ने 26 उर्वरक विक्रय केंद्रों के लाइसेंस निलंबित कर दिए। वहीं 4 ऐसे उर्वरक विक्रय केंद्र भी चिन्हित किए गए जहां अत्यधिक मात्रा में उर्वरक विक्रय पाया गया।

उल्लेखनीय है कि इन केंद्रों के विरुद्ध गत वर्ष भी 15 दिनों के लिए निलंबन की कार्रवाई की जा चुकी थी।

जांच रिपोर्ट और अनुशंसा प्रस्तुत नहीं करने पर कार्रवाई उप संचालक कृषि ने बताया कि उक्त 4 उर्वरक विक्रय केंद्रों के विरुद्ध आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 एवं उर्वरक (नियंत्रण) आदेश 1985 के तहत कार्रवाई करने के लिए संबंधित वरिष्ठ कृषि विस्तार अधिकारियों को समय-सीमा बैठकों एवं विभागीय पत्रों के माध्यम से स्पष्ट निर्देश दिए गए थे।इसके बावजूद दोनों अधिकारियों द्वारा उर्वरक सत्यापन जांच की जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई और न ही किसी प्रकार की अनुशंसा प्रस्तुत की गई। विभागीय निर्देशों की लगातार अनदेखी और उदासीन रवैया अपनाने के कारण कलेक्टर द्वारा दोनों अधिकारियों के विरुद्ध नियमानुसार निलंबन की कार्रवाई की गई।

भ्रामक खबरों पर प्रशासन ने रखा पक्ष

प्रशासन ने स्पष्ट किया कि कुछ वेब पोर्टलों द्वारा “यूरिया वितरण की झूठी जानकारी, बिना जांच-पड़ताल कलेक्टर ने दो कृषि अधिकारियों को किया निलंबित” जैसे शीर्षकों के माध्यम से कार्रवाई को गलत तरीके से प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया है।

उप संचालक कृषि एफ.आर. कश्यप ने कहा कि प्रशासन की कार्रवाई पूरी तरह तथ्यात्मक जांच और निर्धारित प्रक्रिया के अनुरूप की गई है। किसानों के हितों की रक्षा और खाद वितरण व्यवस्था को पारदर्शी बनाए रखने के लिए प्रशासन पूरी गंभीरता और प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रहा है।

किसानों के हित सर्वोपरि : प्रशासन जिला प्रशासन ने साफ किया है कि खाद की जमाखोरी, कालाबाजारी, अनियमित वितरण अथवा इसमें किसी भी प्रकार की संलिप्तता पाए जाने पर संबंधित विक्रेताओं और अधिकारियों के खिलाफ आगे भी कठोर कार्रवाई जारी रहेगी। प्रशासन ने कहा कि किसानों के हित सर्वोपरि हैं और उन्हें समय पर खाद उपलब्ध कराना शासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है।


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