बिलासपुर संभाग में प्रशासनिक रिक्तियां बनी चुनौती, महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्ति का इंतजार।

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तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी

छत्तीसगढ़ के सबसे महत्वपूर्ण प्रशासनिक क्षेत्रों में शामिल बिलासपुर संभाग में कई अहम पद लंबे समय से रिक्त पड़े हुए हैं। इन रिक्तियों के कारण प्रशासनिक कार्यों की गति, निर्णय प्रक्रिया और जनसामान्य से जुड़े मामलों के निराकरण पर प्रभाव पड़ने की आशंका व्यक्त की जा रही है। विशेष रूप से बिलासपुर संभागीय मुख्यालय में अतिरिक्त संभाग आयुक्त की पदस्थापना अब तक नहीं हो सकी है, जबकि संभाग के अंतर्गत आने वाले सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले में अतिरिक्त कलेक्टर और संयुक्त कलेक्टर जैसे महत्वपूर्ण पद भी रिक्त बताए जा रहे हैं।प्रशासनिक विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी संभाग और जिले में वरिष्ठ अधिकारियों की उपलब्धता केवल कार्यालयीन व्यवस्था का विषय नहीं होती, बल्कि यह शासन की योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन, राजस्व प्रकरणों के समयबद्ध निराकरण तथा विकास कार्यों की सतत निगरानी से सीधे जुड़ा हुआ विषय है। ऐसे में लंबे समय तक महत्वपूर्ण पदों का रिक्त रहना कई सवाल खड़े कर रहा है।संभागीय स्तर पर बढ़ा कार्यभारबिलासपुर संभाग छत्तीसगढ़ के सबसे बड़े और महत्वपूर्ण संभागों में से एक माना जाता है। यहां संभागायुक्त कार्यालय के माध्यम से अनेक विभागों के कार्यों की समीक्षा, समन्वय और निगरानी की जाती है। अतिरिक्त संभाग आयुक्त का पद प्रशासनिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि यह पद संभागायुक्त को विभिन्न प्रशासनिक, राजस्व एवं विकास संबंधी कार्यों में सहयोग प्रदान करता है।सूत्रों का कहना है कि अतिरिक्त संभाग आयुक्त की अनुपस्थिति में कई जिम्मेदारियां सीधे संभागायुक्त कार्यालय पर केंद्रित हो जाती हैं, जिससे कार्यभार बढ़ना स्वाभाविक है। इससे निर्णय प्रक्रिया पर भी अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले में भी स्थिति चिंताजनकदूसरी ओर, अपेक्षाकृत नए जिले सारंगढ़-बिलाईगढ़ में अतिरिक्त कलेक्टर और संयुक्त कलेक्टर जैसे पदों का रिक्त रहना भी चर्चा का विषय बना हुआ है। जिला प्रशासन में इन पदों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। राजस्व प्रकरणों की सुनवाई, भूमि संबंधी मामलों का निराकरण, विभिन्न विभागों के समन्वय और शासन की योजनाओं की निगरानी जैसे अनेक कार्य इन अधिकारियों के माध्यम से संपादित किए जाते हैं।स्थानीय लोगों और प्रशासनिक जानकारों का कहना है कि नए जिलों को प्रभावी प्रशासनिक ढांचा उपलब्ध कराने की मंशा से राज्य सरकार ने जिलों का गठन किया था। ऐसे में यदि महत्वपूर्ण पद लंबे समय तक खाली रहें तो नए जिले के गठन के मूल उद्देश्य प्रभावित हो सकते हैं।जनता के कामों पर पड़ सकता है असरविशेषज्ञों के अनुसार प्रशासनिक पदों पर रिक्तियां केवल विभागीय समस्या नहीं होतीं, बल्कि इसका सीधा प्रभाव आम नागरिकों पर पड़ता है। नामांतरण, बंटवारा, भू-अधिकार, राजस्व अपील, शिकायतों के निराकरण और विकास कार्यों की स्वीकृतियों जैसे मामलों में वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। पद रिक्त होने की स्थिति में कई बार लंबित मामलों की संख्या बढ़ने की संभावना रहती है।सरकार से शीघ्र नियुक्ति की अपेक्षाबिलासपुर संभाग और सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले में महत्वपूर्ण पदों की रिक्तता को देखते हुए प्रशासनिक हलकों में यह चर्चा तेज है कि राज्य सरकार को शीघ्र ही इन पदों पर योग्य अधिकारियों की पदस्थापना करनी चाहिए। इससे न केवल प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूती मिलेगी, बल्कि आम जनता को भी बेहतर और समयबद्ध सेवाएं उपलब्ध हो सकेंगी।फिलहाल, संभाग और जिले के प्रशासनिक ढांचे में मौजूद इन रिक्तियों को लेकर विभिन्न वर्गों की निगाहें राज्य शासन के आगामी प्रशासनिक फेरबदल और नियुक्ति आदेशों पर टिकी हुई हैं। प्रशासनिक दक्षता और सुशासन की दृष्टि से इन पदों पर शीघ्र नियुक्ति समय की आवश्यकता मानी जा रही है।


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