सरवानी जलाशय उपेक्षा का शिकार: मात्र 10% पानी शेष, दर्जनों गांवों पर मंडरा रहा जल संकट।

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तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी

बिल्हा विधानसभा क्षेत्र का महत्वपूर्ण सरवानी जलाशय आज गंभीर उपेक्षा और प्रशासनिक उदासीनता का शिकार बन गया है। हालत यह है कि जलाशय में अब केवल लगभग 10 प्रतिशत पानी ही शेष बचा है, जबकि वर्षों से इसकी न तो सफाई कराई गई और न ही कोई विकास या गहरीकरण कार्य किया गया। लगातार बरसात के दौरान आसपास के क्षेत्रों से बहकर आने वाली मिट्टी जलाशय में जमा होती रही, जिससे इसकी जलधारण क्षमता लगातार घटती गई और अब यह लगभग पटने की स्थिति में पहुंच चुका है।इस जलाशय पर सरवानी, हरदीकला, मंगरऊछला, पोंडी, सिलपहरी, लिमतरी सहित अनेक गांवों की जल आवश्यकताएं प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से निर्भर हैं। जलाशय में पानी की कमी का असर अब आसपास के क्षेत्रों के भूजल स्तर पर भी दिखाई देने लगा है। ग्रामीणों का कहना है कि हर वर्ष जल स्तर नीचे जा रहा है, जिससे पेयजल और सिंचाई दोनों पर संकट गहराता जा रहा है।क्षेत्रवासियों का आरोप है कि वर्षों से जनप्रतिनिधियों और प्रशासन का ध्यान इस महत्वपूर्ण जल संरचना की ओर नहीं गया। यदि समय रहते जलाशय का गहरीकरण और सफाई कार्य कराया जाता तो आज यह स्थिति निर्मित नहीं होती। करोड़ों रुपये विभिन्न योजनाओं में खर्च होने के बावजूद जल संरक्षण के इस बड़े स्रोत की अनदेखी समझ से परे है।जलाशय से जुड़ा एक और महत्वपूर्ण मुद्दा पोंडी-हरदी मार्ग है। यह सड़क वर्षों से क्षेत्रवासियों की प्रमुख मांग रही है, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई ठोस कार्य नहीं हुआ। यह मार्ग न केवल जलाशय और आसपास के गांवों को जोड़ता है, बल्कि कॉलेज, डैम तथा राष्ट्रीय राजमार्ग तक पहुंच का महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग भी है। सड़क की खराब स्थिति के कारण ग्रामीणों, विद्यार्थियों और किसानों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि सरकार वास्तव में जल संरक्षण और ग्रामीण विकास को प्राथमिकता देती है तो सरवानी जलाशय का तत्काल सर्वे कराकर गहरीकरण, सफाई और तट संरक्षण कार्य कराया जाना चाहिए। साथ ही पोंडी-हरदी मार्ग का निर्माण भी प्राथमिकता से किया जाना चाहिए, ताकि क्षेत्र के हजारों लोगों को बेहतर आवागमन और जल सुरक्षा का लाभ मिल सके।अब बड़ा सवाल यह है कि क्या प्रशासन और जनप्रतिनिधि इस महत्वपूर्ण जलाशय को बचाने के लिए कोई ठोस पहल करेंगे, या फिर उपेक्षा के कारण यह जलाशय आने वाले वर्षों में इतिहास बनकर रह जाएगा?


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