मुख्य सचिव की सख्त निर्देश:ई-प्रगति पोर्टल की परियोजनाओं में तेजी लाए, जियोटैग फोटो के साथ देनी होगी साप्ताहिक रिपोर्ट।

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तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी

राज्य में संचालित महत्वपूर्ण विकास परियोजनाओं की प्रगति को लेकर मुख्य सचिव विकासशील ने मंत्रालय महानदी भवन में उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक ली। बैठक में उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि सभी लंबित और महत्वपूर्ण परियोजनाओं को निर्धारित समय-सीमा में पूरा किया जाए तथा कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।समीक्षा के दौरान ई-प्रगति पोर्टल पर दर्ज राज्य की प्रमुख परियोजनाओं की स्थिति का विस्तृत आकलन किया गया। इनमें बिलासपुर जिले के उसलापुर और कोनी स्थित वर्किंग वुमेन हॉस्टल, मोबाइल नेटवर्क विस्तार से जुड़ी 4जी स्टेशन डीवीएन टॉवर स्थापना परियोजना, मोबाइल टावरों के लिए विद्युत अधोसंरचना विकास कार्य तथा गरियाबंद जिले की सिकारसर-कोडार रिसीवर लिंक कैनाल परियोजना शामिल रही।मुख्य सचिव विकास शील ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि सभी विभाग परियोजनाओं की प्रगति का नियमित मूल्यांकन करें और प्रत्येक सप्ताह जियोटैग फोटो सहित अद्यतन रिपोर्ट ई-प्रगति पोर्टल पर अनिवार्य रूप से अपलोड करें। उनका कहना था कि इससे निर्माण कार्यों की वास्तविक स्थिति की पारदर्शी निगरानी संभव होगी और परियोजनाओं में अनावश्यक विलंब पर प्रभावी नियंत्रण रखा जा सकेगा।बैठक में मोबाइल टावर स्थापना के दौरान भूमि आवंटन, विद्युत कनेक्टिविटी और अन्य तकनीकी समस्याओं पर भी चर्चा हुई। मुख्य सचिव ने संबंधित जिलों के कलेक्टरों को निर्देश दिए कि वे विभागों के बीच समन्वय स्थापित कर इन बाधाओं का शीघ्र समाधान सुनिश्चित करें, ताकि दूरसंचार सुविधाओं के विस्तार में कोई रुकावट न आए।उन्होंने यह भी कहा कि ई-प्रगति पोर्टल पर दर्ज परियोजनाओं की निगरानी केवल औपचारिकता तक सीमित न रहे, बल्कि जिलों के कलेक्टर स्वयं नियमित समीक्षा कर कार्यों की गति बढ़ाने के लिए आवश्यक कदम उठाएं। निर्माण एजेंसियों को भी समयबद्ध कार्य निष्पादन के लिए जवाबदेह बनाने के निर्देश दिए गए हैं।समीक्षा बैठक में सूचना प्रौद्योगिकी, जल संसाधन तथा उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। वहीं वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से राज्य के विभिन्न जिलों के कलेक्टरों ने बैठक में भाग लेकर अपने-अपने क्षेत्रों की परियोजनाओं की प्रगति की जानकारी साझा की।राज्य सरकार का मानना है कि ई-प्रगति पोर्टल के माध्यम से परियोजनाओं की सतत निगरानी और जियोटैग आधारित रिपोर्टिंग से विकास कार्यों में पारदर्शिता बढ़ेगी तथा योजनाओं का लाभ आम जनता तक समय पर पहुंच सकेगा।


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