तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी

नगर सेना, अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवाएं तथा राज्य आपदा मोचन बल, छत्तीसगढ़ द्वारा जारी एक आदेश ने विभागीय कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। 27 मई 2026 को जारी आदेश में प्रदेश के विभिन्न जिलों के नगर सैनिकों के लिए वर्दी सिलाई मद में कुल 30 लाख रुपये का आवंटन किए जाने की जानकारी दी गई है। आदेश के अनुसार 5000 जोड़ी वर्दियों की सिलाई के लिए प्रति जोड़ी 600 रुपये की दर से राशि प्रदान की गई है।जारी दस्तावेज के अनुसार रायपुर, दुर्ग, बिलासपुर, जगदलपुर, कोरिया, सरगुजा सहित 23 जिलों के लिए वर्दी कपड़ा एवं सिलाई मद में राशि स्वीकृत की गई है। विभाग का दावा है कि नगर सैनिकों को वर्दी उपलब्ध कराने के लिए यह राशि आवंटित की गई है।हालांकि इस आदेश के सामने आने के बाद कई नगर सैनिकों ने नाम प्रकाशित नहीं करने की शर्त पर आरोप लगाया है कि उन्हें केवल वर्दी का कपड़ा दिया जाता है, जबकि सिलाई का पूरा खर्च स्वयं वहन करना पड़ता है। नगर सैनिकों का कहना है कि वर्षों से विभाग की ओर से सिलाई राशि का कोई प्रत्यक्ष लाभ उन्हें नहीं मिला है। यदि प्रति जोड़ी 600 रुपये की दर से सिलाई मद में राशि जारी हो रही है तो यह राशि आखिर किसके पास और किस प्रक्रिया के तहत खर्च की जा रही है, इसकी जांच होनी चाहिए।नगर सैनिकों का आरोप है कि विभाग सिलाई मद के नाम पर राशि का आवंटन तो करता है, लेकिन वास्तविकता में सिलाई का भुगतान जवानों को नहीं किया जाता। ऐसे में यह मामला वित्तीय अनियमितता और संभावित भ्रष्टाचार का रूप ले सकता है। जवानों का कहना है कि यदि विभाग वास्तव में सिलाई का खर्च वहन कर रहा है तो संबंधित भुगतान की जानकारी और रिकॉर्ड सार्वजनिक किए जाने चाहिए।विशेषज्ञों का मानना है कि यदि नगर सैनिकों के आरोप सही पाए जाते हैं तो यह गंभीर वित्तीय अनियमितता का मामला हो सकता है। ऐसे में शासन को सिलाई मद में जारी की गई राशि, उसके भुगतान की प्रक्रिया तथा लाभार्थियों की सूची की स्वतंत्र जांच करानी चाहिए।अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब नगर सैनिक अपनी वर्दी की सिलाई खुद के पैसे से करवा रहे हैं, तब प्रति वर्दी 600 रुपये की दर से जारी होने वाली लाखों रुपये की राशि आखिर जा कहां रही है? यह प्रश्न विभाग की पारदर्शिता और जवाबदेही पर सीधा सवाल खड़ा कर रहा है। अब देखना यह है कि नगर सैनिकों द्वारा लगाए गए उपरोक्त आरोपों की विभाग के जिम्मेदार अफसर द्वारा निष्पक्ष जांच कराते हैं कि नहीं..?