तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी
गौरेला-पेंड्रा-मरवाही वनमंडल में लंबे समय से पदस्थ कर्मचारियों और विभागीय कार्यप्रणाली को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े होने लगे हैं। विभागीय सूत्रों और स्थानीय लोगों द्वारा वनमंडल कार्यालय में पदस्थ मुख्य लिपिक सेल गुप्ता पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। आरोप है कि वे पिछले लगभग 7 वर्षों से “व्यय-1” शाखा का प्रभार संभाल रही हैं और पदोन्नति के बाद भी उसी शाखा में बनी हुई हैं।स्थानीय लोगों का कहना है कि हाल ही में विवादित बाबुओं पर कार्रवाई करते हुए बिलासपुर सीसीएफ कार्यालय द्वारा कैम्पा प्रभारी भूपेंद्र साहू सहित अन्य मामलों में प्रशासनिक सख्ती दिखाई गई, जिससे वनमंडल में पारदर्शिता और प्रशासनिक कसावट देखने को मिली है। इसी क्रम में अब मुख्य लिपिक सेल गुप्ता की पदस्थापना और कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।विभागीय सूत्रों के अनुसार, सेल गुप्ता पहले सहायक ग्रेड-2 के पद पर रहते हुए व्यय-1 शाखा का प्रभार संभाल रही थीं। वर्ष 2024 में पदोन्नति के बाद उन्हें मुख्य लिपिक बनाया गया, लेकिन आरोप है कि पदोन्नति के बाद भी नियमों के विपरीत उन्हें उसी वनमंडल में बनाए रखा गया। जबकि सामान्यतः पदोन्नति के बाद अन्य वनमंडल में पदस्थापना की प्रक्रिया अपनाई जाती है।विभागीय जानकारों का कहना है कि किसी भी शासकीय कर्मचारी को लंबे समय तक एक ही संवेदनशील शाखा में नहीं रखा जाता, ताकि प्रशासनिक निष्पक्षता बनी रहे और वित्तीय अनियमितताओं की संभावना कम हो। आरोप यह भी लगाए जा रहे हैं कि पिछले कई वर्षों में वन प्रबंधन समितियों से जुड़े आहरण और भुगतान मामलों में नियम विरुद्ध अनुमति देने के प्रकरण सामने आए थे, जिनकी निष्पक्ष जांच अब तक नहीं हो सकी है।स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों ने मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने तथा मुख्य लिपिक को तत्काल हटाने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते जांच नहीं हुई तो वन विभाग की कार्यप्रणाली और वित्तीय लेन-देन पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगते रहेंगे।हालांकि, इन आरोपों पर संबंधित अधिकारियों अथवा मुख्य लिपिक की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। मामले को लेकर क्षेत्र में चर्चा तेज हो गई है और लोग विभागीय जांच की मांग कर रहे ।