तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी

बिलासपुर। शिक्षा विभाग की कथित मनमानी, लंबित प्रकरणों और कर्मचारियों की लगातार अनदेखी को लेकर एक बार फिर बड़ा आंदोलन खड़ा होने के संकेत मिल रहे हैं। कर्मचारी संघ के पूर्व जिलाध्यक्ष श्याम मूरत कौशिक ने संयुक्त संचालक (जेडी) शिक्षा बिलासपुर को ज्ञापन सौंपते हुए स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि 31 मई तक लंबित मामलों पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो 16 जून को जेडी शिक्षा कार्यालय बिलासपुर के सामने धरना-प्रदर्शन किया जाएगा।इस ज्ञापन की प्रतियां मुख्यमंत्री, स्कूल शिक्षा मंत्री, शिक्षा सचिव, शिक्षा संचालक, बिलासपुर कमिश्नर एवं बिलासपुर कलेक्टर को भी भेजी गई हैं, जिससे यह मामला अब केवल विभागीय स्तर तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि शासन-प्रशासन के उच्च स्तर तक पहुंच चुका है।जानकारी के अनुसार, यह कोई पहला आंदोलन नहीं है। लगभग एक वर्ष पूर्व भी कर्मचारियों ने जेडी शिक्षा कार्यालय के सामने प्रदर्शन किया था। उस दौरान अधिकारियों द्वारा आश्वासन दिया गया था कि कर्मचारियों की समस्याओं का शीघ्र समाधान किया जाएगा, लेकिन आरोप है कि आज तक न तो किसी प्रकरण का निराकरण हुआ और न ही जिम्मेदार अधिकारियों पर कोई कार्रवाई हुई। इससे कर्मचारियों में गहरा आक्रोश व्याप्त है।कर्मचारी पक्ष का कहना है कि कई कर्मचारी पिछले दस वर्षों से न्याय की उम्मीद में विभागीय कार्यालयों के चक्कर काट रहे हैं। किसी का वेतन संबंधी मामला लंबित है, तो किसी का पदस्थापना, वरिष्ठता, सेवा लाभ अथवा प्रशासनिक प्रताड़ना से जुड़ा विवाद वर्षों से अटका पड़ा है। लगातार आवेदन, ज्ञापन और अनुरोध के बावजूद समाधान नहीं मिलने से कर्मचारी खुद को उपेक्षित और प्रताड़ित महसूस कर रहे हैं।पूर्व जिलाध्यक्ष श्याम मूरत कौशिक ने आरोप लगाया कि शिक्षा विभाग में अधिकारियों की मनमानी लगातार बढ़ती जा रही है। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों की समस्याओं को गंभीरता से लेने के बजाय फाइलों को दबाया जा रहा है और न्यायिक प्रक्रिया को अनावश्यक रूप से लंबा खींचा जा रहा है। उनका कहना है कि जब जिम्मेदार अधिकारी कर्मचारियों की बात सुनने को तैयार नहीं हैं, तब आंदोलन ही अंतिम विकल्प बचता है।उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जेडी शिक्षा विभाग के वर्तमान अधिकारी जून 2026 में सेवानिवृत्त होने वाले हैं और इसी कारण विभागीय जवाबदेही कमजोर पड़ गई है। कर्मचारी नेताओं का कहना है कि रिटायरमेंट नजदीक होने के कारण अधिकारियों पर किसी प्रकार का प्रशासनिक दबाव नहीं दिख रहा, जिससे निर्णय प्रक्रिया और अधिक मनमानीपूर्ण हो गई है।कर्मचारी संगठनों का मानना है कि यदि समय रहते शासन ने हस्तक्षेप नहीं किया, तो यह आंदोलन और व्यापक रूप ले सकता है। कर्मचारियों के बीच यह भावना तेजी से बढ़ रही है कि वर्षों से लंबित मामलों में न्याय दिलाने के लिए अब केवल धरना-प्रदर्शन और जनदबाव ही प्रभावी माध्यम बचा है।अब सभी की नजर 31 मई की समय-सीमा पर टिकी हुई है। यदि तब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो 16 जून को बिलासपुर स्थित जेडी शिक्षा कार्यालय के सामने होने वाला प्रदर्शन शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े कर सकता है।