विकास नंद/ सर्वव्यापी
छत्तीसगढ़ में प्रशासनिक नेतृत्व में महिलाओं की भागीदारी लगातार नई ऊंचाइयों को छू रही है। राज्य सरकार द्वारा वर्ष 2026 को ‘महतारी गौरव वर्ष’ के रूप में मनाए जाने के बीच प्रदेश की प्रशासनिक व्यवस्था भी महिला सशक्तिकरण की सशक्त तस्वीर प्रस्तुत कर रही है। वर्तमान में प्रदेश के 33 जिलों में से 9 जिलों की कमान महिला कलेक्टरों के हाथों में है, वहीं राज्य मंत्रालय में चार वरिष्ठ महिला आईएएस अधिकारियों के पास गृह, राजस्व, पंचायत एवं ग्रामीण विकास जैसे सबसे प्रभावशाली विभागों की जिम्मेदारी है।यह उपलब्धि केवल महिला प्रतिनिधित्व तक सीमित नहीं है, बल्कि शासन-प्रशासन में महिलाओं की बढ़ती नेतृत्व क्षमता और उन पर सरकार के भरोसे का भी प्रमाण है। जिला प्रशासन में कार्यरत महिला कलेक्टर कानून-व्यवस्था बनाए रखने, विकास योजनाओं की प्रभावी निगरानी, शिक्षा, स्वास्थ्य, राजस्व प्रबंधन तथा जनकल्याणकारी योजनाओं के सफल क्रियान्वयन में उल्लेखनीय भूमिका निभा रही हैं। जनदर्शन, समयबद्ध शिकायत निवारण और नवाचार आधारित प्रशासनिक कार्यशैली के कारण कई महिला कलेक्टर अपनी विशिष्ट पहचान बना चुकी हैं।दूसरी ओर, राज्य मंत्रालय में कार्यरत चार वरिष्ठ महिला आईएएस अधिकारियों के पास शासन के सबसे महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी है। गृह विभाग कानून-व्यवस्था की रीढ़ माना जाता है, जबकि राजस्व विभाग भूमि प्रबंधन और प्रशासनिक व्यवस्था का प्रमुख आधार है। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ग्रामीण अर्थव्यवस्था और आधारभूत विकास को गति देने का कार्य करता है। इन महत्वपूर्ण विभागों का नेतृत्व महिला अधिकारियों के हाथों में होना उनकी प्रशासनिक दक्षता, निर्णय क्षमता और नेतृत्व कौशल का प्रमाण माना जा रहा है।प्रशासनिक विशेषज्ञों का मानना है कि शीर्ष पदों पर महिलाओं की बढ़ती भागीदारी से निर्णय प्रक्रिया अधिक संवेदनशील, पारदर्शी और जनकेंद्रित बनती है। इससे प्रशासन में जवाबदेही बढ़ती है तथा समाज में सकारात्मक संदेश जाता है। साथ ही यह उन युवतियों के लिए प्रेरणा का स्रोत भी है, जो भारतीय प्रशासनिक सेवा और राज्य प्रशासनिक सेवाओं में अपना भविष्य बनाना चाहती हैं।’महतारी गौरव वर्ष’ के दौरान जिला मुख्यालयों से लेकर मंत्रालय तक महिला नेतृत्व की यह मजबूत उपस्थिति केवल एक प्रशासनिक उपलब्धि नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ में बदलती प्रशासनिक सोच और महिलाओं की बढ़ती भागीदारी का प्रतीक बन गई है। यह स्पष्ट संकेत है कि प्रदेश में सुशासन की नई तस्वीर में महिला नेतृत्व अब निर्णायक भूमिका निभा रहा है।
महिला नेतृत्व की प्रमुख प्रशासनिक अधिकारी:
दिव्या उमेश मिश्रा,आर. संगीता, चंदन संजय त्रिपाठी,नम्रता जैन,निहारिका बारिक सिंह,नुपूर राशि पन्ना,पद्मिनी भोई साहू,प्रतिष्ठा ममगाई,रेना जमील,शम्मी आबिदी,संतन देवी जांगड़े,रीना बाबा साहेब कंगाले,ऋचा शर्मा।