तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी
छत्तीसगढ़ के वन विभाग में शीर्ष पद प्रधान मुख्य वन संरक्षक (पीसीसीएफ) की नियुक्ति को लेकर सत्ता के गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म है। विभागीय सूत्रों के हवाले से ऐसी चर्चाएं सामने आ रही हैं कि पीसीसीएफ के पद पर नियुक्ति दिलाने के नाम पर करोड़ों रुपये की कथित सौदेबाजी की जा रही थी। हालांकि, इन दावों की अभी तक किसी स्वतंत्र एजेंसी या आधिकारिक स्रोत से पुष्टि नहीं हुई है।चर्चाओं के अनुसार, मुख्यमंत्री के नाम का कथित दुरुपयोग करते हुए लगभग 20 करोड़ रुपये की मांग किए जाने की बातें सामने आ रही हैं। वहीं यह भी दावा किया जा रहा है कि कथित सौदेबाजी कराने वाले एक बिचौलिए को 5 लाख रुपये अग्रिम दिए जाने की चर्चा है। इन आरोपों की अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया भी सामने नहीं आई है।यदि इन चर्चाओं में तनिक भी सच्चाई है, तो यह केवल वन विभाग ही नहीं बल्कि पूरे प्रशासनिक तंत्र की पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करेगा। शीर्ष पदों पर नियुक्ति यदि योग्यता और वरिष्ठता के बजाय कथित आर्थिक लेन-देन के आधार पर होने लगे, तो शासन व्यवस्था पर जनता का विश्वास प्रभावित होना स्वाभाविक है।राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में यह भी चर्चा है कि इस पूरे प्रकरण से जुड़े कुछ दस्तावेज, ऑडियो, चैट या अन्य साक्ष्य सामने आ सकते हैं। यदि ऐसा होता है, तो यह मामला राज्य की राजनीति और नौकरशाही में बड़ी हलचल पैदा कर सकता है।फिलहाल इन सभी दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। यदि किसी व्यक्ति, अधिकारी या जनप्रतिनिधि का नाम इस प्रकरण में सामने आता है, तो उसका पक्ष भी निष्पक्ष रूप से प्रकाशित किया जाना आवश्यक होगा। अस्वीकरण: यह समाचार विभिन्न सूत्रों और चर्चाओं पर आधारित है। इसमें वर्णित आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। किसी भी व्यक्ति को दोषी नहीं ठहराया जा रहा है। यदि संबंधित पक्ष अपना पक्ष देना चाहते हैं, तो उसे प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।


