छत्तीसगढ़ में बढ़ती आउटसोर्सिंग व्यवस्था से युवाओं का भविष्य संकट में, नियमित शासकीय भर्ती की मांग को लेकर प्रदेशभर में आवाज बुलंद। - Sarvavyapi छत्तीसगढ़ में बढ़ती आउटसोर्सिंग व्यवस्था से युवाओं का भविष्य संकट में, नियमित शासकीय भर्ती की मांग को लेकर प्रदेशभर में आवाज बुलंद। - Sarvavyapi

छत्तीसगढ़ में बढ़ती आउटसोर्सिंग व्यवस्था से युवाओं का भविष्य संकट में, नियमित शासकीय भर्ती की मांग को लेकर प्रदेशभर में आवाज बुलंद।

Share Now

धनंजय साहू, ब्यूरो चीफ सर्वव्यापी

छत्तीसगढ़ प्रदेश में लगातार बढ़ रही आउटसोर्सिंग व्यवस्था ने लाखों शिक्षित एवं बेरोजगार युवाओं के भविष्य पर प्रश्नचिह्न खड़ा कर दिया है। विभिन्न शासकीय विभागों, निगमों, मंडलों, विश्वविद्यालयों, अस्पतालों तथा अन्य सरकारी संस्थानों में नियमित भर्ती के स्थान पर आउटसोर्सिंग एवं संविदा के माध्यम से नियुक्तियां किए जाने से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं में गहरा असंतोष व्याप्त है।प्रदेश के युवाओं का कहना है कि वे वर्षों तक कठिन परिश्रम कर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं, लेकिन नियमित भर्ती प्रक्रिया समय पर प्रारंभ नहीं होने के कारण उन्हें रोजगार के अवसर नहीं मिल पा रहे हैं। दूसरी ओर, रिक्त पदों पर निजी एजेंसियों के माध्यम से नियुक्तियां किए जाने से पारदर्शिता, समान अवसर एवं स्थायी रोजगार की भावना प्रभावित हो रही है।आउटसोर्सिंग व्यवस्था में कार्यरत कर्मचारियों को अपेक्षाकृत कम वेतन, सीमित सेवा सुविधाएं, नौकरी की अस्थिरता तथा भविष्य की अनिश्चितता जैसी अनेक समस्याओं का सामना करना पड़ता है। इससे कर्मचारियों का मनोबल प्रभावित होता है और सरकारी सेवाओं की गुणवत्ता पर भी असर पड़ सकता है।प्रदेश के शिक्षित बेरोजगार युवाओं ने राज्य सरकार से मांग की है कि सभी विभागों में स्वीकृत एवं रिक्त पदों का तत्काल आंकलन कर नियमित भर्ती कैलेंडर जारी किया जाए। साथ ही, छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC), व्यापम तथा अन्य भर्ती एजेंसियों के माध्यम से समयबद्ध एवंटी पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया संचालित की जाए, ताकि योग्य युवाओं को उनकी प्रतिभा के अनुरूप अवसर मिल सके।युवाओं ने यह भी मांग की है कि जिन पदों पर कार्य की प्रकृति स्थायी है, वहां आउटसोर्सिंग व्यवस्था के बजाय नियमित नियुक्ति को प्राथमिकता दी जाए। यदि किसी विशेष परिस्थिति में आउटसोर्सिंग आवश्यक हो, तो ऐसे कर्मचारियों के लिए समान कार्य का समान वेतन, सामाजिक सुरक्षा, ईपीएफ, ईएसआई, मातृत्व एवं अन्य श्रमिक अधिकारों का पूर्ण पालन सुनिश्चित किया जाए।युवाओं का मानना है कि रोजगार केवल आर्थिक आवश्यकता नहीं, बल्कि सामाजिक सम्मान, आत्मनिर्भरता और प्रदेश के विकास का आधार है। यदि नियमित भर्तियां समय पर नहीं होंगी तो प्रदेश के लाखों युवाओं का मनोबल टूटेगा और बेरोजगारी की समस्या और गंभीर होगी।प्रदेश के सभी सामाजिक संगठनों, छात्र संगठनों, कर्मचारी संगठनों एवं जनप्रतिनिधियों से भी अपील की गई है कि वे युवाओं की इस न्यायसंगत मांग का समर्थन करें तथा सरकार के समक्ष नियमित भर्ती प्रक्रिया प्रारंभ करने की मांग को प्रमुखता से उठाएं।हमें विश्वास है कि छत्तीसगढ़ सरकार युवाओं की भावनाओं का सम्मान करते हुए नियमित शासकीय भर्तियों को प्राथमिकता देगी, सभी रिक्त पदों पर शीघ्र भर्ती प्रक्रिया प्रारंभ करेगी तथा प्रदेश के युवाओं को सुरक्षित एवं सम्मानजनक रोजगार उपलब्ध कराने की दिशा में ठोस निर्णय लेगी।


Share Now

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You cannot copy content of this page

error: Content is protected !!