बिलासपुर/ तरुण कौशिक/ संपादक सर्वव्यापी/
जब से छत्तीसगढ़ की स्थापना हुई है,तब से लगातार भू-माफियाओं की बाढ़ सी आ गई है जो खेती भूमि को बिना परिवर्तित कर बेच रहे हैं बल्कि कालोनियों से लगे सरकारी जमीन तक को राजस्व विभाग की मिलीभगत से वारा न्यारा किया जा रहा है। बिलासपुर जिला मुख्यालय से 15 किलोमीटर की सीमा में अवैध कालोनियों का ऐसा जाल बिछ चुका है,जिसे चाहकर भी जिला प्रशासन रोक लगाने में फेलवर साबित हो जाएंगे क्योंकि भू-माफियाओं को सरकार का संरक्षण मिल रहा है तो राजनीतिक दलों से जुड़े नेता भी जमीन का कारोबार करने में माहीर नजर आ रहे हैं।
बिलासपुर जिले के मंगला,उसलापुर,सकरी, हांफा, रतनपुर मार्ग, सीपत मार्ग और रायपुर मार्गं पर 15 किलोमीटर के भीतर दर्जनों भर ऐसे कालोनी बन चुके हैं। जिसमें अधिकांश कालोनी रेरा से पंजीकृत नहीं हुए हैं और मध्यम वर्गीय के लोग जमीन खरीद कर मकान बनाकर रहने लगे हैं। जहां पर न तो पक्की सड़क है और न ही पक्की नाली का निर्माण किया गया है यहां तक छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय और बिलासा बाई केवंटीन हवाईअड्डे के आसपास दर्जनों भर कालोनी का निर्माण किया जा चुका है। जिसमें अधिकांश कालोनी राजनीतिक दलों से जुड़े नेताओं का है और यही कारण है कि बिना परिवर्तित कृषि भूमि को बड़े दबंगई से बेचा जा रहा है तो वहीं इन दोनों प्रतिष्ठित संस्थानों के आसपास लगभग 5 किलोमीटर की दूरी पर बसे कालोनियों से सटे शासकीय भूमि को भी भू-माफियाओं ने बेच डाली है। जिसमें हाईकोर्ट से लगे एक कालोनी का मामला हाईकोर्ट में पूर्व सरपंच ने याचिका दायर किया है मगर हाईकोर्ट भी इस मामले पर कोई सुनवाई नहीं कर पा रहे हैं। वहीं सर्वव्यापी कुछ अवैध प्लाटिंग का खुलासा अपने आगामी अंकों में करेंगी।