संगठन के पदाधिकारियों को मिल गई लालबत्ती… भाजपा में बदलाव कब..? अध्यक्ष की नियुक्ति के लिए सुशासन तिहार में आवेदन…फिर भी सरकार गंभीर नहीं…?

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बिलासपुर/ तरुण कौशिक/ संपादक सर्वव्यापी/

छत्तीसगढ़ की विष्णु देव साय सरकार ने अपने कार्यकर्ताओं को लंबे समय तक इंतजार कराकर अंततः लालबत्ती का तोहफा दे दिया। जिसमें भाजपा संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारी गण भी शामिल हैं और लंबे समय से भाजपा संगठन में बदलाव की बात कही जा रही है लेकिन अब तक बदलाव देखने को नहीं मिल पा रहा है। प्रदेश में भाजपा की सरकार बनते ही सर्वप्रथम भाजपा संगठन में शामिल रहे केदार कश्यप को मंत्री का दायित्व दिया गया, लेकिन मंत्री केदार कश्यप अब तक संगठन के पदाधिकारी के रुप में कार्य कर रहे हैं और इनके हस्ताक्षर से आज भी कई आदेश भाजपा संगठन से निकलती है तो वहीं अब प्रदेश के विभिन्न निगम, मंडल, आयोग, बोर्ड में भाजपा संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारियों को अध्यक्ष के पद पर नियुक्ति कर लालबत्ती सवारी करने का अवसर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने दे दी है लेकिन अब तक भाजपा संगठन में बदलाव देखने को नहीं मिल रहे हैं। भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष भूपेंद्र सिंह सवन्नी से लेकर संजय श्रीवास्तव सहित अन्य पदाधिकारियों को लालबत्ती का तोहफा दिया है , इसलिए अब इन्हें भाजपा संगठन की जिम्मेदारी से हटाकर नये दायित्व को निभाने के लिए पूरी तरह से छोड़ देना चाहिए और नये सिरे भाजपा संगठन में बदलाव करना चाहिए। जिसमें पूर्व विधायकों,पूर्व मंत्रियों को संगठन की जिम्मेदारी देकर भाजपा संगठन को मजबूत करते हुए सरकार को बेहतर तरीके से लोकप्रियता बनाने के लिए इनके अनुभव का लाभ लेने की आवश्यकता है। निश्चित रुप से भाजपा की विष्णु देव साय सरकार के लिए बड़े ही शर्म की बात है कि वह अब तक पूर्ण मंत्री मंडल विस्तार नहीं कर पाए और न ही संसदीय सचिव की नियुक्ति और न ही पूर्ण रूप से निगम, मंडल आयोग, बोर्ड में अध्यक्ष की नियुक्ति , और इसके लिए सरकार की सुशासन तिहार में आवेदन पत्र देना सरकार के कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल खड़ा करती है..! इसके बाद भी सरकार शेष बचे निगम, मंडल, आयोग,बोर्ड में नियुक्ति को लेकर गंभीर न हो पाना मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के लिए बड़े ही चिंतन करने का विषय है। वहीं प्रदेश भाजपा अध्यक्ष किरण सिंह देव अपने संगठन को मजबूत करने की दिशा में संगठन में फेरबदल क्यों नहीं कर पा रहे हैं ,यह किरण सिंह देव ही जाने। बहरहाल देखना है कि भाजपा संगठन में कब तक बदलाव होती है।


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