पूर्व राज्यपाल बैस की सक्रियता से विरोधियों की उड़ी नींद..?

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बिलासपुर/ तरुण कौशिक/ संपादक सर्वव्यापी/

छत्तीसगढ़ ही नहीं बल्कि देश की राजनीतिक में अहम् भूमिका निभाने वाले रायपुर लोकसभा के अजेय योद्धा सात बार के सांसद रह चुके रमेश बैस को केंद्र सरकार ने तीन राज्यों का राज्यपाल की जिम्मेदारी देते हुए पूरी तरह से फ्री कर चुके हैं और राज्यपाल पद से सेवानिवृत्त होने के बाद से 75 वर्षीय रमेश बैस पुनः भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर चुके हैं। जिन्हें अब तक भाजपा संगठन ने कोई बड़ी जिम्मेदारी नहीं दी है लेकिन इनकी सक्रियता को देखकर इनके राजनीतिक विरोधियों का नींद उड़ गई है,यह हम नहीं बल्कि राजनीतिक पंडितों का कहना है।

बिलासपुर जिले के मस्तूरी विधानसभा क्षेत्र के मां डिडिनेश्वरी देवी की नगर मल्हार में हजारों की संख्या में असम, झारखंड और महाराष्ट्र जैसे बड़े राज्यों के राज्यपाल रह चुके रमेश बैस का नागरिक अभिनंदन सम्मान समारोह का आयोजन एक निजी विद्यालय संस्थान द्वारा किया गया। जिसमें विधानसभा के पूर्व नेता प्रतिपक्ष नारायण चंदेल, छत्तीसगढ़ राज्य योग आयोग अध्यक्ष रुप नारायण सिन्हा सहित वरिष्ठ भाजपा नेता उपस्थित थे । इस कार्यक्रम को देखकर न केवल बिलासपुर की राजनीतिक में हलचल मची बल्कि राजधानी से लेकर सरगुजा, जशपुर, बस्तर तक इस कार्यक्रम को लेकर चर्चा होने लगी । वहीं बेदाग छवि के पूर्व राज्यपाल रमेश बैस ने पत्रकारों से चर्चा करते हुए विभिन्न मुद्दों पर बेबाकी से अपनी बात कही। जिसमें उन्होंने कही कि मंत्रीमंडल विस्तार सरकार को जल्द कर देनी चाहिए और शेष बचे निगम, मंडल आयोग बोर्ड के साथ ही संसदीय सचिव की नियुक्ति बिना देर किए कर देनी चाहिए इसके अलावा उन्होंने कहा कि संगठन में कुछ नियम लागू है, इसके तहत कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी दी जाती है और वह अब भाजपा के सामान्य कार्यकर्ता हैं ,उनको जो जिम्मेदारी संगठन देगी उसे वह जरुर निभाएंगे और वह अब विधायक, सांसद का टिकट की मांग भी नहीं करेंगे। भाजपा संगठन के हर एक कार्यकर्ता प्रधानमंत्री के सामान है और भाजपा हर कार्यकर्ता का सम्मान करती है। वहीं इनके सक्रियता से जहां विरोधियों का नींद उड़ गई है,वही सोचनीय विषय है कि राज्यपाल के पद से रिटायर होने के बाद छत्तीसगढ़ आगमन होने के कुछ दिन बाद रमेश बैस भाजपा प्रदेश कार्यालय पहुंच कर पार्टी की सदस्यता ग्रहण कर लिए थे लेकिन सरकार और भाजपा संगठन ने अब तक इनके राजनीतिक अनुभव को भुनाने के लिए इन्हें किसी तरह की जिम्मेदारी नहीं दी है और न ही इन्हें भाजपा के वरिष्ठ नेता होने के बाद भी संरक्षक, मार्गदर्शक के रुप में शामिल न करना बड़े ही चिंता का विषय है लेकिन कुछ दिनों से रमेश बैस की सक्रियता से सबकी होश उड़ गई है। खासकर सत्ता और संगठन में पद पर आसीन नेताओं की कल मल्हार के समारोह को देखकर नींद गायब हो गई है। निश्चित रूप से भाजपा संगठन को चाहिए कि रमेश बैस जैसे दिग्गज नेता को संगठन की जिम्मेदारी देकर सरकार को बेहतर ढ़ंग से संचालित करने की जिम्मेदारी देनी चाहिए ताकि आने वाले समय में भाजपा की सरकार दोबारा बन सके। वैसे विष्णु सरकार की क्या स्थिति है सभी को पता है लेकिन कोई खुलकर नहीं बोल पा रहे हैं। बहरहाल रमेश बैस जैसे दिग्गज नेता का भाजपा कहां और किस जगह प्रयोग करती है,यह तो आने वाले समय में पता चल ही जाएगा।


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