गौरेला-पेंड्रा-मरवाही/श्रीनिवास सुमेर/ब्यूरो चीफ सर्वव्यापी /
प्रदेश के प्रथम मुख्यमंत्री दिवंगत अजीत जोगी के गृह जिले में आदिवासियों के हित में सरकार द्वारा कई उल्लेखनीय कार्य किए जा रहे हैं पर प्रशासनिक लापरवाही के कारण आदिवासी समुदाय के लोगों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है। खास कर राजस्व प्रकरणों को लेकर किसानों में प्रशासनिक अधिकारियों के खिलाफ रोष व्याप्त दिखाई पड़ते हैं। इसी कड़ी में जिले की कलेक्टर लीना कमलेश मंडावी ने बीते सप्ताह ही प्रशासनिक कसावट लाने के लिए जिला स्तर में फेरबदल की थी और पेंड्रारोड अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व)के रुप में अपने अधीनस्थ डिप्टी कलेक्टर ऋचा चंद्राकर को पदस्थ की है। जिसके परिपालन में ऋचा ने पदभार ग्रहण करते ही राजस्व प्रकरणों को समय-सीमा में निपटाने के साथ ही राजस्व विभाग की धूमिल हो चुकी छवि को स्वच्छ बनाने पर जोर देने का प्रयास की है। जिले की पेंड्रारोड अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) ऋचा चंद्राकर के लिए उक्त पद पहली पदस्थापना हुई है, जिन्हें अनुभाग में लापरवाह राजस्व विभाग को सुधारने के साथ ही राजस्व संग्रहण, भूमि वितरण, भूमि अभिलेखों का रखरखाव, और सरकारी भूमि की सुरक्षा करने की बड़ी चुनौती उनके सामने है। । इसी तरह जाति प्रमाण पत्र, आय प्रमाण पत्र, और अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज जारी करने में देर लतीफी न हो, राजस्व कानून के अनुसार राजस्व मामलों का समय-सीमा पर निपटारा करना और प्राकृतिक आपदाओं के दौरान राहत वितरण का पर्यवेक्षण करना महत्वपूर्ण कार्य में शामिल हैं। वहीं आवास विहीन और भूमिहीन व्यक्तियों को बंजर भूमि आवंटित कराने, जिससे वे अपने जीवनयापन के लिए खेती कर सकें। सरकारी भूमि को अवैध अतिक्रमण से बचाने औरआय प्रमाण पत्र, निवासी प्रमाण पत्र, कानूनी उत्तराधिकारी प्रमाण पत्र, और अन्य आवश्यक दस्तावेज भी जारी करने लेकर बारीकी से जांच, परीक्षण कर ही कार्रवाई करना प्रमुख रूप से शामिल हैं। वहीं राजस्व विभाग के अंर्तगत विभिन्न राजस्व मामलों का निपटारा, म्यूटेशन (नाम परिवर्तन), संपत्ति विवाद, और अन्य संबंधित मुद्दे का निराकरण के अलावा बाढ़, चक्रवात, या आग से प्रभावित लोगों को राहत सामग्री और अन्य सहायता समय सीमा में हितग्राहियों को लाभ मिल सके। इसके अलावा नव पदस्थ अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) ऋचा चंद्राकर को अपने अधीनस्थ तहसीलदार, नायाब तहसीलदार, राजस्व निरीक्षको, के कार्यों में पारदर्शिता लाने पर जोर देना होगा। वहीं भूमि स्वामियों को समय सीमा में ऋण पुस्तिका वितरित करने पर ध्यान देने की आवश्यकता पड़ेगी क्योंकि इस क्षेत्र के किसानों को अपनी भूमि को सुरक्षित रखने में सहायता मिल सके। वहीं जिला मुख्यालय होने के कारण निजी भूमि के अधिग्रहण के तहत भू-राजस्व में कमी पर भी ध्यान नहीं देने के कारण भू-माफियाओं द्वारा सरकारी भूमियों पर अवैध प्लाटिंग कर बिक्री कर रहे हैं। जिला गौरेला पेंड्रा मरवाही को बने पांच साल हो चुके हैं लेकिन बड़े ही चिंता का विषय है कि इस जिले में आदिवासियों को न्याय नहीं मिल पा रहा है और छोटे- छोटे कार्यों के लिए विभिन्न दफ्तर खासकर राजस्व संबंधित प्रकरणों के लिए किसानों को भटकना पड़ता है। ऐसे स्थिति में एसडीएम ऋचा चंद्राकर को निश्चित रूप से राजस्व विभाग को सुधारने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाना पड़ेगा। बहरहाल देखना है कि ऋचा चंद्राकर एसडीएम के रुप में किस तरह से कार्य कर अपनी स्वच्छ छवि को और बेहतर बनाएगी।