विकास नंद/ सर्वव्यापी/

सरायपाली विकास खंड में खम्हारपाली परिवहन जांच चौकी होने के बावजूद ओव्हरलोड वाहनों पर किसी भी प्रकार की कार्रवाई नहीं की जा रही है जिससे यह साफ प्रतीत होता है कि परिवहन विभाग के अधिकारियों को इन गाड़ियों पर कारवाई नहीं करने के लिए चढ़ावा दिया जाता होगा क्योंकि बीते विधानसभा सत्र में सरायपाली विधायक चातुरी नंद ने विधानसभा में फ्लाई ऐश परिवहन करने वाले ओव्हरलोड वाहनों के संबंध में प्रश्न किया था चूंकि परिवहन विभाग मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के पास हैं इस संबंध में उन्हें भी जवाब देने में परेशानी हुई आखिर खम्हारपाली बेरियर के अधिकारी किसके सरपरस्ती में ओव्हरलोड वाहनों पर क्यों कारवाई नहीं कर रहे हैं जिसके कारण प्रदेश के मुखिया की साफ सुथरी छबि धूमिल हो रही है यह समझ से परे है। सरायपाली बाईपास और शहर की सड़क शानदार होने के बावजूद ओव्हरलोड वाहनों के टायर फटने की घटनाएं रोज देखने को मिल ही जाती है जिससे सड़क दुर्घटनाओं का खतरा पुराने चेक पोस्ट झिलमिला चौक पर हमेशा बना रहता है।
रायगढ़ सरायपाली नेशनल हाईवे पर एनटीपीसी से फ़्लाई ऐश ढ़ोने वाली वाहनों की मनमानी चरम पर पहुंच गयी जिसके कारण आमजन को आवागमन करने में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है ग्रामीणों ने कहा कि एनटीपीसी से निकलने वाली गीला फ्लाइ ऐश वाहनों से सड़क पर गिरता रहता है.सूखने के बाद यही फ्लाइ ऐश छोटे-बड़े वाहनों के चक्के में लगकर हवा में उड़ता रहता है.पूरे वातावरण को प्रदूषित कर रहा है.लोगों ने बताया कि उड़ते फ्लाइ ऐश से दुकानदार सहित आम नागरिक व राहगीर को बहुत परेशानी हो रही है. दो पहिया व चार पहिया वाहनों को आने जाने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है. धूल से दुर्घटना की भी संभावना बनी रहती है.सड़क किनारे व्यवसाय करने वाले दुकानदारों का कहना है कि फ्लाई ऐश की ढुलाई से व्यवसाय में बहुत नुकसान उठाना पड़ रहा है. एनटीपीसी द्वारा गीली फ्लाई ऐश के परिवहन के कारण रायगढ़ से सारंगढ़ तक राष्ट्रीय राजमार्ग-153 पर प्रदूषण हो रहा है। हमारे द्वारा फ्लाई ऐश ढोंने वाले वाहन चालक से बात की गई वाहन चालक ने बताया कि फ्लाई ऐश में चलने वाली अधिकांश वाहन ओव्हर लोड माल लेकर चलती है जिसके सड़क पर डस्ट गिरता है और लोगों को सड़क पर उड़ने वाली धूल के कारण आवागमन करने में परेशानी होती है परंतु आखिर इतने गंभीर मामले पर प्रशासनिक अधिकारी एंव परिवहन विभाग की कौन सी मजबूरी है जो इन वाहनों पर कारवाई नहीं की जा रही है आपको बता दें कि छत्तीसगढ़ विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत ने कोरबा संसदीय क्षेत्र में फ्लाई ऐश का मामला उठाया.नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि जो फ्लाई ऐश उत्सर्जन होता है वो दिल दिमाग स्वास्थ्य पानी को प्रभावित करता है.आज काफी ज्यादा फ्लाई ऐश उत्सर्जन होने लगा है. उद्योगों ने कहां-कहां किस किस कार्य के लिए फ्लाई ऐश को खपाया है.उद्योगों ने ये जवाब दिया है कि ईंट बनाने में,सीमेंट उत्पादन में और भराव करने में फ्लाई ऐश को खपाया जाता है. ये जो जानकारी उद्योगों से आपको प्राप्त हुई,इस जवाब का आपने भौतिक सत्यापन करवाया है.विभाग करता है सत्यापन :इस सवाल के जवाब में मंत्री श्यामबिहारी जायसवाल ने कहा कि ”उद्योग समय समय पर इसकी जानकारी देते हैं.विभाग भी इसका समय-समय पर सत्यापन करता है.इसके बाद विभाग ये जानकारी जुटाती है कि उस राखड़ का इस्तेमाल किया जा रहा है कि नहीं किया जा रहा है. नियमों का पालन नहीं करने पर कारवाई की बात तो मंत्री जी ने कह दी परंतु धरातल पर ऐसे मनमानी करने वाले वाहन मालिकों और कंपनी पर किस प्रकार की कार्रवाई होती नहीं दिखाई देती।संयंत्र से निकलने वाले फ्लाई ऐश के परिवहन एवं भंडारण के लिए विभिन्ना नियम एनजीटी द्वारा बनाए गए हैं। स्थानीय प्रशासनिक स्तर पर भी कई नियम इसके लिए बनाए गए हैं परंतु कारखाना प्रबंधन द्वारा इन नियमों को दरकिनार करते हुए फ्लाई ऐश का परिवहन धड़ल्ले से किया जा रहा है। संयंत्र से निकलने वाले फ्लाई ऐश के परिवहन एवं भंडारण के लिए विभिन्न नियम एनजीटी द्वारा बनाए गए हैं। स्थानीय प्रशासनिक स्तर पर भी कई नियम इसके लिए बनाए गए हैं परंतु कारखाना प्रबंधन द्वारा इन नियमों को दरकिनार करते हुए फ्लाई ऐश का परिवहन धड़ल्ले से किया जा रहा है। एनटीपीसी लारा संयंत्र द्वारा निकलने वाले फ्लाई ऐश का परिवहन ओडिशा में किया जाना बताकर जिले में ही यहां-वहां डालकर प्रदूषण फैलाया जा रहा है। खास बात यह कि प्रबंधन को इसकी भनक भी नहीं है। या यह कहें कि जानबूझकर प्रबंधन आंखें मूंदे हुए है।एक और महत्वपूर्ण बात यह कि फ्लाई ऐश का परिवहन कर रही इन गाड़ियों में 10 से 12 बकेट फ्लाई ऐश लोड कर दिया जाता है। जबकि परिवहन के लिए वजन का निर्धारण किया जाना चाहिए। लेकिन बिना वजन किए भारी-भरकम वाहन ओवरलोड फ्लाई ऐश लेकर बेखौफ दौड़ती है, इसका अंजाम यह होता है कि फ्लाइ एस पूरे सड़क में उड़ती रहती है। यह अक्सर पी़छे आर रहे वाहन चालकों की आंख में पड़कर सड़क दुर्घटना का कारण बनता है। फ्लाई ऐश के कारण स्थानीय और क्षेत्रीय लोगों का रहना तक दूभर हो जाता है। नियमानुसार फ्लाई ऐश का परिवहन हमेशा बंद गाड़ियों में करने का प्राविधान है। परंतु संयंत्र द्वारा डाला बाडी या ओपन गाड़ियों को फ्लाई ऐश के परिवहन के लिए दे दिया जाता है।फ्लाई ऐश की समस्या को लेकर लगातार शिकायतें की जाती है, पीड़ित लोगों के द्वारा चक्का जाम किया जाता है। समस्या अखबारों की सुर्खियां बनती है, तो जिम्मेदार विभाग के द्वारा केवल दिखावे के लिए कार्यवाही कर दी जाती है। ऐसा ही मामला कुछ दिनों पहले देखने को मिला था। शिकायत के बाद अचानक आरटीओ विभाग की टीम ने क्षेत्र में दबिश दी और फ्लाई ऐश से लदी कुछ गाड़ियों पर नाम मात्र के लिए कार्यवाही कर पल्ला झाड़ लिया। फ्लाई ऐश की समस्या से लोग जब त्रस्त होते हैं, तो चक्का जाम किया जाता है, फिर प्रबंधन और प्रशासन के द्वारा समझाइश का दौर चलता है और चक्का जाम खुलवा दिया जाता है। चक्का जाम होने के बाद कुछ दिनों तक सिस्टम में कुछ बदलाव आता है, वाहनों में सही तरीके से तिरपाल ढंके जाते हैं, रफ्तार भी नियंत्रित रहती है, लगातार सड़कों पर पानी का छिड़काव किया जाता है, लेकिन फिर मामला जब ठंडा होता है, तो सिस्टम फिर बदल जाता है। फ्लाई ऐश ढोने वाली गाड़ियों की गति दोगुनी हो जाती है, ड्राइवर तिरपाल ढंकना भी उचित नहीं समझते हैं, और सड़क पर पानी का छिड़काव होना भी बंद हो जाता है। जिसके बाद फिर राहगीरों को फ्लाई ऐश का स्वाद मजबूरी में चखना पड़ता है। अब तमनार क्षेत्र में जो स्थिति निर्मित हो चुकी है, एक बार फिर क्षेत्रवासियों के सब्र का बांध टूटता दिख रहा है, जिससे कयास लगाए जा रहे हैं कि एक बार फिर एक बड़ा आंदोलन प्रदूषण के विरोध में छिड़ेगा।बहरहाल छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के सख्त निर्देश के बावजूद पर्यावरण संरक्षण विभाग, और परिवहन विभाग की ऐसी क्या विवशता है कि नियमों की अवेहलना कर मनमानी करने वाले इन कंपनियों पर विभाग अंकुश लगाने में असफल साबित हो रही है।