बिलासपुर/ तरुण कौशिक/ संपादक सर्वव्यापी/
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय द्वारा जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाकर कार्य की जा रही है जो निश्चित रूप से काफिल ए तारीफ है लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही उठता है कि विष्णु देव साय भ्रष्टाचार को कैसे खत्म करेंगे,शायद इसका सटीक जवाब मुख्यमंत्री के पास भी न हो..! छत्तीसगढ़ राज्य बनने के बाद प्रथम मुख्यमंत्री अजीत जोगी के कार्यकाल में भ्रष्टाचार की खबरें कम ही सुनने को मिलता था, वहीं रमन सरकार के समय भी बहुत कम भ्रष्टाचार की खबर सामने आई मगर जब से कांग्रेस में भूपेश बघेल की सरकार बनी , छत्तीसगढ़ में भ्रष्टाचार का धब्बा ही लग गया है और छोटे से छोटे काम के लिए कुछ नहीं तो कम से कम बीस हजार रुपए का भेंट चढ़ाने पर संबंधित का फाइल आगे बढ़ती थी और यही हाल वर्तमान में विष्णु देव साय सरकार में भी देखने को मिल रहा है , फिर भी विष्णु सरकार भ्रष्टाचार, रिश्वतखोरी खत्म करने पर जोर दे रहे हैं। इन दिनों छत्तीसगढ़ में सबसे बड़े घोटाले के रुप में भारत माला परियोजना में सामने आ रही है। जिसमें पटवारी से लेकर राजस्व विभाग के जिम्मेदार अधिकारी का नाम सामने आ रहे हैं और भविष्य में जांच के दौरान किसी आईएएस अफसर का नाम इस भ्रष्टाचार में सुनने को मिलता है तो आश्चर्यजनक नहीं होगी , क्यों कि कोई भी सरकारी विभाग में भ्रष्टाचार, घोटाले, हेराफेरी बिना किसी विभाग प्रमुख के नहीं हो सकता है और यह तो अरबों रुपए का परियोजना है। जिसमें आईएएस अफसर ही नहीं बल्कि मंत्रियों का नाम भी सामने आ सकते हैं, बशर्ते ईमानदारी से जांच की जाती है तो..! वहीं विष्णु देव साय सरकार हर सप्ताह कैबिनेट की बैठक रख रहे हैं और जनहित में फैसले कर रहे हैं लेकिन यह फैसले धरातल में दिखाई नहीं पड़ेगी तो समझो कि यह भी भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई है। जहां एक ओर विष्णु देव साय जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत काम करने में विश्वास रखते हैं तो वहीं ग्राम पंचायत से लेकर मंत्रालय, संचालनालय तक सभी विभागों में भ्रष्टाचार का बोलबाला आज भी जारी है और इसी बीच एंट्री करप्शन ब्यूरो द्वारा भी छोटे-छोटे रिश्वतखोरियों को पकड़ रहे हैं लेकिन अभी तक बड़े भ्रष्टाचारियों और रिश्वतखोरियों को यह भी नहीं पकड़ पा रहे हैं। भाजपा की सरकार बनते ही कांग्रेस सरकार में हुए घोटाले में फंसे आईएएस अफसर और पूर्व मंत्री, रसूखदार नेता जेल में बंद हैं ,जिसे बदले की राजनीति कहा जा रहा है मगर जमीनी सच्चाई यह है कि विष्णु देव साय की सरकार में भी जमकर घोटाले और रिश्वतखोरी की घटनाएं खुलेआम हो रही है लेकिन यह सत्तापक्ष के होने के कारण इन पर एंट्री करप्शन ब्यूरो की बात दूर सीबीआई और ईडी भी कुछ नहीं कर पा रहे हैं। यही कारण है कि सत्ता पक्ष के एक मंत्री सालभर के भीतर अपने रिश्तेदारों के नाम करोड़ों रुपये की जमीन जायदाद खरीद लिए हैं,यह हम नहीं बल्कि राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है और मंत्री पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही है जो समझ में आ ही जाता है कि सत्ता पक्ष के खिलाफ कोई कार्रवाई करने की हिम्मत नहीं दिखा पाएंगे। बहरहाल मुख्यमंत्री विष्णु देव साय एक सरल सहज व्यक्तित्व के धनी हैं , कहीं यह अपने भ्रष्ट के मंत्रियों के कारण इनकी छवि धूमिल न हो इसलिए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को अपने दामन को बचाकर रखने की आवश्यकता है और रही बात भ्रष्टाचार को जड़ से मिटाने की तो फिर इस भ्रष्टाचार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी नहीं मिटा पा रहे हैं तो मुख्यमंत्री विष्णु देव साय कैसे मिटा पाएंगे,जरा जरुर सोचिएगा..!