कबीरधाम/ चेतन साहू / ब्यूरो चीफ सर्वव्यापी/
केंद्र सरकार द्वारा महिलाओं के हित में बनाए गए कानून का किस हद का दुरुपयोग किया जा रहा है,इसका कई उदाहरण देखने को मिल रहे हैं और महिला कानून की धाराओं को परिवर्तन करने की मांग भी जारी है लेकिन राजनीतिक समीकरण न बिगाड़े इस सोच के कारण केंद्र और राज्य सरकार महिला कानून में बदलाव को लेकर कोई कार्रवाई नहीं कर पा रहे हैं । जिसके कारण आज बेकसूर लोग जेल में बंद होने विवश हैं। इसी कड़ी में महिला कानून का किस तरह दुरुपयोग किया जा रहा है,उसका एक उदाहरण राज्य के एक जिले में मिल रही है, जहां पर एक महिला द्वारा बीते 15 सालों से शादी-शुदा व्यक्ति को खुद का पति बताकर दुनिया भर में बदनाम करने के साथ ही महिला थाना से लेकर पुलिस अधीक्षक तक शिकायत किया गया है और उस शादी-शुदा व्यक्ति पर बीते 15 सालों से बलात्कार करने का आरोप लगाया है। जबकि इस केस में रोचक तथ्य यह है कि महिला खुद शादी-शुदा है और अपने पति और ससुराल वालों पर दहेज प्रथा के तहत मामला दर्ज करा चुकी है और जिस व्यक्ति पर 15 सालों से बलात्कार करने का आरोप लगा रही है उसे महिला थाना में ही नहीं अन्य पुलिस थानों में खुद का पति बताकर पति को समझाइश देने की आवेदन पत्र प्रस्तुत कर चुकी है और अपने खुद के पति या पिता का नाम सरकारी दस्तावेजों में नाम अंकित कराने के बजाए जिस व्यक्ति पर बलात्कार करने का सनसनीखेज आरोप लगाई है उसका नाम पति के रुप में आधार कार्ड, राशनकार्ड, बैंक खाता सहित अन्य सरकारी दस्तावेजों पर नाम अंकित कराया है और इसी के आधार पर पीड़ित युवक को उक्त महिला द्वारा महिला कानून की धाराओं में एकतरफा एफआईआर दर्ज होने के कारण बीते 15 सालों से ब्लैकमेलिंग करते आ रही है। वहीं पीड़ित युवक के बिना सहमति के शिकायतकर्ता महिला ने किस आधार पर अपने आधार कार्ड सहित अन्य सरकारी दस्तावेजों पर पीड़ित युवक का नाम अंकित कराया है,इसकी शिकायत भूतपूर्व राज्यपाल से लेकर वर्तमान सरकार, पुलिस प्रशासन तक करने के बाद भी कोई जांच नहीं किया जा रहा है। जबकि महिला की शिकायत पर पुलिस अधीक्षक ने संबंधित पुलिस थाना को तत्काल कार्रवाई करने का आदेश दे दी है । निश्चित रूप से इस मामले को देखकर जांच अधिकारी और अन्य पुलिस अधिकारी भी हैरान हो चुके हैं कि महिला युवक को पति बता रही हैं और उसी पर बलात्कार का गंभीर आरोप लगाई रही है। जबकि युवक अपने पद- प्रतिष्ठा और मान -सम्मान बचाने के लिए शिकायतकर्ता को आज भी हर महीने 10 से 15 हजार रुपए दे रही है और मकान बनाकर देने की बात भी कही ,और सामाजिक कार्यकर्ताओं के सामने भी युवक ने मकान बनाकर देने की बात कही ,बस उसे कुछ महीने,साल का समय मांगा है,इसे पीड़ित युवक ने शासन -प्रशासन को लिखे पत्र में भी उल्लेख किया है लेकिन उक्त महिला द्वारा लगातार पीड़ित युवक को परेशान करने में लगे हुए हैं। वहीं जिस तरह से इस मामले पर महिला दबाव बना रही है, उससे साफ लगता है कि पीड़ित युवक को न्याय नहीं मिलेगा और जेल की सलाखों में कैद होना पड़ेगा।——-//——- खुदकुशी करता है तो आश्चर्य की बात नहीं होगी वहीं पीड़ित युवक के शिकायतों को पुलिस प्रशासन के जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा शुरू से अभी तक गंभीरता से लेते तो शायद यह सब नौबत नहीं आती, और जिस मानसिक तनाव से युवक जिंदगी जी रहा है, वह कभी भी मौत को गले लगा लेता है तो हैरानी की बात नहीं होगी।