बिलासपुर/ तरुण कौशिक/ संपादक सर्वव्यापी /
छत्तीसगढ़ राज्य की न्यायधानी बिलासपुर जिले में इन दिनों शिक्षा विभाग और राजनीतिक गलियारों में एक विशेष वर्ग का दबदबा देखने को मिल रहा है और मनमुताबिक अन्य वर्ग के कर्मचारियों के साथ ही राजनीतिक से जुड़े लोगों को बदनाम कर अपने लोगों को लाभान्वित करने की सोच को लेकर बेवजह लंबी-चौड़ी शिकायतें की जा रही है। इसी कड़ी में बिलासपुर जिले के शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर संयुक्त संचालक शिक्षा संभाग बिलासपुर, संभागायुक्त बिलासपुर और कलेक्टर से शिकायत की गई है। जिसमें बिलासपुर जिले के बिल्हा विकास खंड के शिक्षा अधिकारी सुनीता ध्रुव को झूठी शिकायत कर पूर्व कलेक्टर से बेईज्जत करने में कोई कसर नहीं छोड़ी गई है और अब वर्तमान में इन्हें हटाकर अन्य को बीईओ बनाने की रणनीति के तहत सुनीता ध्रुव को बदनाम करने की साज़िश रची जा रही और किसी भी प्रकरण पर फंसाकर उन्हें प्रभारी बीईओ के पद से हटाकर उन्हें मूल पद एबीईओ के पद पदस्थ करने की तैयारी की जा रही है। बताते चलें कि बिल्हा विकास खंड में पूर्व जिला शिक्षा अधिकारियों ने ऐसे शिक्षकों को एबीईओ की जिम्मेदारी दी है,जो पात्रता नहीं रखते हैं, लेकिन इसकी खबर होने के बाद भी किसी कलेक्टर ने कोई कार्रवाई नहीं की है। बिल्हा विकास खंड में सुनीता ध्रुव पहली महिला शिक्षा अधिकारी बनी है और वह आदिवासी समुदाय से आती है और इसे फंसाने की रणनीति के तहत एक विशेष वर्ग के एक कर्मचारी खास बने हुए हैं, जिन्होंने कभी भी अपने मूल पद शिक्षक पद पर नियुक्ति से लेकर आज शिक्षकीय कार्य नहीं किए हैं बल्कि एक अधिकारी बनकर सेवा किए हैं और इसी का मोहरा बनकर सुनीता ध्रुव ने कोई न कोई ग़लती की होगी, जिसके आधार पर इन्हें बीईओ पद से हटाने की तैयारी चल रही है। देखना है कि सुनीता ध्रुव यहां पर कब तक बीईओ बनी रहती है।