डी ई ओ पर लगे गंभीर आरोप, निष्पक्ष जांच एवं पद से हटाने की मांग तेज।

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बिलासपुर/के.एस.ठाकुर/कार्यकारी संपादक सर्वव्यापी/

शिक्षा विभाग में पारदर्शिता और नैतिकता के उच्च मानकों की अपेक्षा के बीच बिलासपुर के जिला शिक्षा अधिकारी अनिल तिवारी पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। संयुक्त संचालक, शिक्षा संभाग घोड़ा दाना स्कूल, तारबाहर, बिलासपुर को एक विस्तृत निवेदन पत्र गौटिया बाड़ा तिफरा निवासी हरिशंकर पाण्डेय ने सौंपा है। जिसमें तिवारी के कार्यकाल में हुई कथित अनियमितताओं और फर्जीवाड़े की निष्पक्ष जांच तथा उन्हें पद से हटाने की मांग की गई है।अनिल तिवारी पर लगे प्रमुख आरोप इस प्रकार हैं: कराटे योजना में करोड़ों का घोटाला-निवेदन में आरोप लगाया गया है कि समग्र शिक्षा अभियान के दौरान महारानी लक्ष्मीबाई कराटे कार्यक्रम के नाम पर करोड़ों रुपये का फर्जी लेन-देन किया गया। कराटे संघ के माध्यम से विद्यालय प्राचार्यों के खातों में पैसा ट्रांसफर कर नकद राशि वापस ली गई, जो एक बड़े आर्थिक अपराध की ओर इशारा करता है। निजी वाहनों के माध्यम से वित्तीय लाभ- तिवारी पर अपने एवं परिचितों के निजी वाहनों को सर्व शिक्षा अभियान में शामिल कर लाखों की राशि हड़पने का आरोप है।फर्जी बिलों के जरिये लेन-देनजनवरी 2025 से अप्रैल 2025 तक फर्जी बिलों के माध्यम से सरकारी धन के दुरुपयोग की बात कही गई है।योजना मद राशि का दुरुपयोगयोजना मद की राशि का अनुचित प्रयोग कर निजी लाभ उठाने का भी आरोप लगाया गया है। जातिगत भेदभाव और पदों का दुरुपयोग ,सहायक विकासखंड शिक्षा अधिकारी शिवराम टंडन (मस्तुरी) और विकासखंड शिक्षा अधिकारी विजय टंडन (कोटा) को फर्जी शिकायतों के आधार पर पद से हटाने की बात कही गई है। इसके पीछे जातिगत पूर्वाग्रह और सत्ता स्थापित करने की मंशा का आरोप भी सामने आया है। निज निवास पर जातीय बैठकों का आयोजन, आरोप है कि तिवारी अपने निवास स्थान पर अपने समाज की बैठकें करते हैं तथा कार्यालय में जाति विशेष के लोगों को उपकृत करने में संलग्न रहते हैं, जो सिविल सेवा आचरण नियमों के प्रतिकूल है।आदिवासी अधिकारियों के विरुद्ध षडयंत्र ,सुनीता ध्रुव, विकासखंड शिक्षा अधिकारी बिल्हा को हटाने के लिए कथित षडयंत्र रचने का भी गंभीर आरोप लगाया गया है। समान जाति के लोगों को फील्ड विज़िट में शामिल करनाफील्ड दौरे में हमेशा एक ही जाति विशेष के लोगों – जैसे प्रफुल्ल शर्मा, संजय शर्मा, विवेक दुबे – को साथ ले जाने की बात कही गई है।वहीं पिछड़ा वर्ग के लोगों को प्रताड़ित करते हुए पास्को एक्ट के तहत एफ आई आर दर्ज करने के लिए पिछड़ा वर्ग के लोगों को ही दर्ज कराया गया इसके पहले उनको धमकी भी दिया गया तुमको रगड़ दूंगा और अन्य अपने लोगों को किसी को कुछ नहीं किया इस तरह से एसटी-एससी ओबीसी वर्ग के लोगों को मानसिक शारीरिक आर्थिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है। वहीं पूर्व प्रभारी प्राचार्य रहे वहां भी आर्थिक अनिमिता के तहत इनके ऊपर कड़ी कार्यवाही हुई थी और जिसे जांच ठंडा बस्ते में हैनिष्कर्ष एवं मांग: निवेदन पत्र में यह स्पष्ट मांग की गई है कि अनिल तिवारी के विरुद्ध सभी आरोपों की निष्पक्ष जांच की जाए और यदि आरोप प्रमाणित होते हैं तो उन्हें तत्काल जिला शिक्षा अधिकारी पद से हटाया जाए। आरोपों की गंभीरता को देखते हुए यह मामला केवल विभागीय जांच का नहीं बल्कि उच्च स्तरीय प्रशासनिक हस्तक्षेप का विषय बन चुका है। संपर्क में रहने वाले सूत्रों का कहना है कि यदि प्रशासन ने शीघ्र कदम नहीं उठाया तो यह मामला व्यापक विरोध और आंदोलन का रूप भी ले सकता है। बहरहाल देखना है कि इस शिकायत पर उच्च अधिकारी क्या करते हैं। वहीं जिला शिक्षा अधिकारी अनिल तिवारी ने इस मामले पर सर्वव्यापी से कहा कि जो आरोप लगाए गए,वह बेबुनियाद है, शिकायत की गई है तो वह जांच के लिए तैयार है।


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