बिलासपुर/ तरुण कौशिक/ संपादक सर्वव्यापी/
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बीते महीने की प्रथम सप्ताह ही राज्य के विभिन्न निगम, मंडल, आयोग और बोर्ड में अध्यक्षों, उपाध्यक्ष की नियुक्ति की है,जो एक मनोनीत पदों की श्रेणी में शामिल हैं लेकिन मजे कि बात यह है कि जिन-जिन निगम, मंडल, आयोग और बोर्ड में मनोनीत अध्यक्षों ने पदभार ग्रहण किया है उसके लिए एक विशेष आयोजन रखा गया। जिसमें मुख्यमंत्री विष्णु देव साय सहित अन्य मंत्री और विधानसभा अध्यक्ष डॉ रमन सिंह भी शामिल हुए और इस तामझाम में मनोनीत अध्यक्षों की खुद का पैसा नहीं बल्कि संबंधित विभाग का लाखों रुपए पानी की तरह बहाया गया और पदभार ग्रहण करने के बाद मनोनीत अध्यक्षों की कामकाज की बात किया जाए तो जीरो प्वॉइंट ही मिल रहा है। सर्वव्यापी की टीम ने राज्य के विभिन्न निगम, मंडल, आयोग और बोर्ड में अध्यक्षों की पदभार ग्रहण करने के बाद उनकी कामकाज को लेकर संबंधित निगम, मंडल, आयोग और बोर्ड पहुंचे तो एक ही जवाब मिले कि मनोनीत अध्यक्ष पदभार ग्रहण करने के पश्चात दो तीन बार से अधिक दफ्तर नहीं आए और यहां का काम काज सिर्फ सरकारी कागजों में हो रहे , जमीन पर कुछ नहीं हो रहे हैं। निश्चित रुप से मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने भाजपा संगठन में काम करने वालों के साथ ही पूर्व रमन सरकार में निगम, मंडल, आयोग और बोर्ड में अध्यक्ष बने थे, उन में से अधिकांश नेताओं को इस बार फिर अध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई है लेकिन बड़े ही चिंता का विषय है कि पूर्व रमन सरकार के वक्त भी यह सब एक वेतनभोगी अध्यक्ष बनकर रह गए और शायद अब विष्णु देव साय की राज में भी मनोनीत अध्यक्ष एक वेतनभोगी बनकर रह जाएंगे,यह हम नहीं बल्कि सरकार के वरिष्ठ अफसरों के मुख से सुनने को मिल रहा है। जिस पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को निगरानी की आवश्यकता है। बहरहाल छत्तीसगढ़ की विष्णु देव साय सरकार निगम, मंडल, आयोग और बोर्ड की अध्यक्षों की कामकाज को लेकर क्या निगरानी रखते हैं,यह देखने वाली बात होगी।